Kolkata: कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कोलकाता में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए।प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने '' बीजेपी हाये हाये, पीएम मोदी हाये हाये'' का नारा लगाया . पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया जारी है । दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि 15 जनवरी से बढ़ाकर 19 जनवरी कर दी गई है, जिससे मतदाताओं को अपने आवेदन जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है (फॉर्म 6 के माध्यम से नए मतदाता नाम जोड़ना, फॉर्म 7 के माध्यम से नाम हटाना और फॉर्म 8 के माध्यम से सुधार करना)।
इसके अलावा, इन दावों और आपत्तियों पर सुनवाई 7 फरवरी, 2026 तक जारी रहेगी। पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी।पश्चिम बंगाल में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके चलते राज्य की राजनीति में गरमाहट आ गई है ।सोमवार को, राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच, मुर्शिदाबाद में फॉर्म 7 जमा करने को लेकर लालबाग एसडीओ कार्यालय के बाहर टीएमसी और भाजपा समर्थकों के बीच झड़प हुई।
भाजपा ने आरोप लगाया कि टीएमसी विधायक असित मजूमदार ने एसडीओ कार्यालय में फॉर्म 7 फाड़ दिए। भाजपा ने X पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, " टीएमसी विधायक असित मजूमदार का गुंडों के साथ एसडीओ कार्यालय में घुसकर फॉर्म 7 फाड़ना खुलेआम कानून का उल्लंघन है।"
हालांकि, मजूमदार ने इन आरोपों का खंडन किया। हुगली में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "यह झूठ है। क्या आपने मुझे इसे फाड़ते हुए देखा है?"
इस बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को मतदाता सूची की चल रही एसआईआर में 'तार्किक विसंगतियों' की श्रेणी में आने वाले मतदाताओं के नाम प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली विभिन्न याचिकाओं पर ईसीआई को निर्देश जारी किए ।
सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि चुनाव आयोग ने 'तार्किक विसंगतियों' की श्रेणी में आने वाले कुछ व्यक्तियों को नोटिस जारी किए हैं। अतः, इस श्रेणी में शामिल व्यक्तियों की सहायता के लिए न्यायालय ने ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में ऐसे व्यक्तियों के नाम प्रकाशित करने का निर्देश दिया।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग को दस्तावेजों और आपत्तियों पर विचार करने और प्रभावित होने वाले व्यक्तियों के लिए सुनवाई प्रक्रिया का पालन करने हेतु पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध कराए। इस संबंध में, चुनाव आयोग/राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त कर्मियों की तैनाती के लिए निर्देश जारी किए जाएं।
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