पश्चिम बंगाल: राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा संकट लगातार गहराता जा रहा है। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद पार्टी में उठे अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त व स्वास्थ्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य के सभी पदों से इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उनके इस्तीफे को लेकर टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और पार्टी के भीतर नई बहस शुरू हो गई है।
कुणाल घोष ने कहा कि जब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं, तब चंद्रिमा भट्टाचार्य के पास कई महत्वपूर्ण विभाग थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज जब पार्टी के पास देने के लिए पद नहीं बचे हैं, तो लोग दूरी बना रहे हैं और मुश्किल समय में नेतृत्व का साथ छोड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम पूर्व नियोजित रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
इधर, इस्तीफे के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य को विधानसभा में विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी से मुलाकात करते हुए देखा गया। बताया जा रहा है कि वे उनके चैंबर में बागी गुट के अन्य नेताओं के साथ भी मौजूद थीं। हालांकि इस बैठक में क्या चर्चा हुई, इसका आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन इस मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।
चंद्रिमा भट्टाचार्य पहले ममता बनर्जी सरकार में वित्त और स्वास्थ्य विभाग संभाल चुकी हैं। वे हाल ही में 5 जून को ही पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त की गई थीं, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। साथ ही उन्होंने बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और चुनाव आयोग में पार्टी की प्रतिनिधि भूमिका भी छोड़ दी है।
टीएमसी में लगातार बढ़ते मतभेद और नेताओं के इस्तीफों को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पार्टी के भीतर गंभीर संकट का संकेत है। वहीं विपक्षी खेमे में भी इस घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है, जिससे बंगाल की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है।