तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी): अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त एवं स्वास्थ्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और पार्टी के भीतर गुटबाजी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चंद्रिमा ने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक बात से उन्हें गहरा आघात पहुंचा, जिसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया।
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हाल ही में तृणमूल भवन में हुई एक घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फोन पर उनसे कहा कि उन्होंने पार्टी कार्यालय यानी तृणमूल भवन को कुछ लोगों के हाथों में सौंप दिया है। चंद्रिमा के अनुसार, यह बात उन्हें बेहद आहत करने वाली लगी क्योंकि वह नियमित रूप से तय समय पर पार्टी कार्यालय जाती थीं और अपने कर्तव्यों का पालन करती थीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाली थी, इसलिए उन्होंने सभी पदों से इस्तीफा देना उचित समझा।
इस्तीफे के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला। बताया जा रहा है कि इस दौरान बागी गुट के कई नेता भी मौजूद थे। हालांकि बैठक में क्या बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इस मुलाकात को टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।
इधर, टीएमसी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने चंद्रिमा भट्टाचार्य पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम पहले से तय रणनीति का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चंद्रिमा भट्टाचार्य के परिवार पर पहले से भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच चल रही है। घोष ने कहा कि जब ममता बनर्जी के पास महत्वपूर्ण विभाग थे, तब चंद्रिमा के पास कई बड़े पद थे, लेकिन अब हालात बदलने पर वे नाराज होकर पार्टी छोड़ रही हैं।
दूसरी ओर, तृणमूल भवन को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि ईएम बाईपास स्थित पार्टी कार्यालय पर एक गुट ने कब्जा कर लिया और गेट पर ताला लगा दिया। इस दौरान रीतब्रत बनर्जी समेत कई बागी नेता वहां मौजूद रहे। वहीं, ममता समर्थक गुट का कहना है कि यह कब्जा सरकार और पुलिस की मिलीभगत से हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर तनाव और बढ़ा दिया है।
हालांकि, विवाद के बीच भी ममता बनर्जी की तस्वीरें और पोस्टर पार्टी कार्यालय में लगे रहे। बागी नेताओं का कहना है कि वे अभी भी ममता बनर्जी को पार्टी का मार्गदर्शक मानते हैं और उनके प्रति सम्मान बनाए रखेंगे। लेकिन संगठन में चल रहे टकराव ने टीएमसी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टीएमसी के भीतर लंबे समय से चल रहे असंतोष और सत्ता संतुलन की लड़ाई का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व इस संकट को कैसे संभालता है और क्या बागी गुट वापस पार्टी में लौटता है या यह विभाजन और गहरा होता है।