पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील योजना को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार राज्य में शाकाहार को थोपने की कोशिश कर रही है और बच्चों के पोषण के साथ समझौता किया जा रहा है। इस मुद्दे पर टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।
डेरेक ओब्रायन ने कहा कि सरकार की नीतियों से यह साफ होता है कि बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील में बदलाव करके उन्हें अंडों जैसे पोषक तत्वों से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम बच्चों के पोषण अधिकारों के खिलाफ है और इससे उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री ने बजट भाषण में मिड-डे मील योजना के तहत भोजन के प्रबंधन और वितरण में इस्कॉन के सहयोग के संकेत दिए। खबरों के अनुसार, इस्कॉन द्वारा तैयार किए जाने वाले नए मेन्यू में अंडों के स्थान पर शाकाहारी प्रोटीन स्रोत शामिल किए जाने की बात सामने आई है। इसी को लेकर टीएमसी ने आपत्ति जताई है।
डेरेक ओब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव के समय मछली खाने को लेकर जिस तरह का राजनीतिक विवाद हुआ था, अब वही सोच नीति के रूप में सामने आ रही है। उन्होंने इसे बंगाल की परंपराओं और भोजन संस्कृति पर हमला बताया।
टीएमसी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि एक तरफ राजनीतिक विरोधियों पर अंडों का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों के मिड-डे मील से अंडों को हटाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि इससे गरीब बच्चों को जरूरी पोषण से वंचित किया जाएगा।
दूसरी ओर, भाजपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया में कहा गया है कि सरकार का उद्देश्य केवल भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को सुधारना है। हालांकि, इस पूरे मुद्दे ने बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
फिलहाल मिड-डे मील योजना को लेकर यह विवाद राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।