Baloch कमेटी का पाकिस्तान सरकार पर बड़ा आरोप

Update: 2026-07-10 10:03 GMT

Balochistan , बलूचिस्तान:  बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) ने ग्वादर ज़िले के जिवानी में कई घरों को गिराए जाने की खबरों पर पाकिस्तानी अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। कमेटी ने इस कार्रवाई को बलोच परिवारों के खिलाफ़ सरकारी दमन को और तेज़ करने वाला कदम बताया है।

'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, समूह ने आरोप लगाया कि ज़बरदस्ती गायब किए गए असगर अली के परिवार के घर और कम से कम छह अन्य घरों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के गिरा दिया गया।

'द बलूचिस्तान पोस्ट' के मुताबिक, BYC ने कहा कि असगर अली के गायब होने के बाद से ही उनके परिवार वालों को बार-बार सुरक्षा बलों की छापेमारी, डराने-धमकाने और ज़बरदस्ती बयान देने के दबाव का सामना करना पड़ा है। संगठन का दावा है कि भारी मशीनों का इस्तेमाल करके की गई यह ताज़ा तोड़-फोड़, परिवार के व्यवस्थित उत्पीड़न का एक और चरण है।

कमेटी ने आगे आरोप लगाया कि जिवानी में रिज़वान रशीद, अली असगर, गुलाम नबी जाफ़र, यार जान, मोहम्मद जान और गनी जाफ़र के घर भी गिरा दिए गए। BYC का कहना है कि बिना न्यायिक मंज़ूरी या कानूनी आधार के परिवारों को उनके घरों से बेदखल करना और खराब मौसम में अपनी संपत्ति को नष्ट होते देखने के लिए मजबूर करना, बुनियादी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

संगठन का दावा है कि ऐसी कार्रवाइयां पाकिस्तान के अपने संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा प्रावधानों के दायरे से बाहर जाकर की जा रही हैं।

BYC ने आगे आरोप लगाया कि बलूचिस्तान के अलग-अलग हिस्सों - जैसे कराची, टंप में कोहाड, जिवानी में पनवान और मस्तुंग में दश्त - में रिहायशी संपत्तियों को जलाने, लूटने, नुकसान पहुंचाने और गिराने की ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने सुरक्षा कर्मियों, खासकर फ्रंटियर कॉर्प्स के सदस्यों पर बिना किसी जवाबदेही के इन ऑपरेशनों को अंजाम देने का आरोप लगाया।

BYC ने इन कथित अत्याचारों पर चुप्पी साधने के लिए पाकिस्तानी राजनीतिक दलों और सरकारी संस्थानों की भी आलोचना की। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से आग्रह किया कि वे इन घरों को गिराए जाने की घटनाओं की जांच करें और पाकिस्तान पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दबाव डालें।

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