कोलकाता। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए पश्चिम बंगाल के कम से कम 30 पर्यटक नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास अचानक आई बाढ़ के बाद से संपर्क से बाहर हो गए हैं। पर्यटकों के लापता होने की खबर के बाद उनके परिवारों में चिंता का माहौल है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पर्यटकों की स्थिति की जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं।
जानकारी के अनुसार, 30 पर्यटकों के इस समूह में एक ट्रैवल कंपनी के दो कर्मचारी भी शामिल थे। यह दल 21 अगस्त को कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हुआ था। इसके बाद सभी यात्री अगले दिन नेपाल पहुंचे थे। यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, मंगलवार को यह समूह नेपाल की राजधानी काठमांडू में मौजूद था।
बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह यह दल नेपाल-चीन सीमा के पास स्थित एक इमिग्रेशन कार्यालय पहुंचा था। इसी दौरान नेपाल-तिब्बत बॉर्डर क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ और खराब मौसम की स्थिति के बाद पर्यटकों से संपर्क टूट गया।
नेपाल के रसुवा जिले और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने कई इलाकों को प्रभावित किया है। बाढ़ के कारण सड़क मार्ग और संचार व्यवस्था पर भी असर पड़ा है, जिससे वहां मौजूद लोगों से संपर्क करने में परेशानी हो रही है।
पर्यटकों के परिवारों ने संपर्क टूटने के बाद चिंता जताई है। कई परिजनों ने संबंधित ट्रैवल कंपनी और प्रशासन से यात्रियों की जानकारी मांगी है। अधिकारियों की ओर से समूह के सदस्यों की स्थिति का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यात्रा पर गए इस समूह में अलग-अलग उम्र के लोग शामिल बताए जा रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु नेपाल के रास्ते जाते हैं। इस दौरान यात्रियों को कई दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़ता है, जहां मौसम में अचानक बदलाव परेशानी पैदा कर सकता है।
नेपाल प्रशासन भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है। खराब मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई जगहों पर राहत पहुंचाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय अधिकारियों की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि पर्यटकों की सही स्थिति का पता लगाया जा सके।
कैलाश मानसरोवर यात्रा को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु इस यात्रा के लिए नेपाल और तिब्बत क्षेत्र का रुख करते हैं। यात्रा मार्ग में ऊंचे पहाड़, कठिन रास्ते और मौसम की चुनौती रहती है।
इससे पहले भी मानसून के दौरान नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। ऐसे में प्रशासन लगातार यात्रियों को मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यात्रा करने की सलाह देता है।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता संपर्क से बाहर हुए पर्यटकों की सुरक्षित जानकारी प्राप्त करना है। संबंधित एजेंसियां ट्रैवल कंपनी और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से यात्रियों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास कर रही हैं।
पर्यटकों के परिजनों को उम्मीद है कि जल्द ही सभी यात्रियों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलेगी। प्रशासन ने भी कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जैसे ही कोई जानकारी सामने आएगी, उसे साझा किया जाएगा।