कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद और तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने चुनाव आयोग (ECI) को वैकल्पिक नामों और चुनाव चिह्नों की सूची सौंप दी है। साथ ही, गुट ने आयोग के अंतरिम आदेश पर कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है।

सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी गुट ने गुरुवार रात करीब 11:36 बजे ईमेल के जरिए चुनाव आयोग को अपने वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प भेजे। बताया जा रहा है कि ये विकल्प आयोग के निर्देश के विरोध के साथ सौंपे गए हैं।

दरअसल, चुनाव आयोग ने गुरुवार रात एक अंतरिम आदेश जारी किया था। इसमें तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रहे गुटीय विवाद को देखते हुए दोनों गुटों को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों में पार्टी के नाम और मौजूदा चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था।

आयोग ने अपने आदेश में कहा था कि जब तक विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक कोई भी गुट तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

इसके साथ ही चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से कहा था कि वे शुक्रवार सुबह तक अपने पसंदीदा वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प जमा करें, ताकि उपचुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

आयोग का यह निर्देश आगामी उपचुनावों को देखते हुए जारी किया गया है। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी परेशानी से बचने के लिए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था की है।

ममता बनर्जी गुट ने आयोग के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि वह अपने मूल नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अपना दावा जारी रखेगी। हालांकि, आयोग के निर्देशों के तहत वैकल्पिक विकल्प भी जमा किए गए हैं।

राजनीतिक दलों में विभाजन या गुटीय विवाद की स्थिति में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर फैसला चुनाव आयोग करता है। आयोग संबंधित पक्षों के दावों, संगठनात्मक समर्थन और दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेता है।

TMC का ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न लंबे समय से पार्टी की पहचान रहा है। चुनावी राजनीति में किसी भी दल के लिए उसका नाम और प्रतीक बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि मतदाता इन्हीं माध्यमों से पार्टी की पहचान करते हैं।

इस विवाद के बीच दोनों गुटों की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने फिलहाल अंतरिम व्यवस्था लागू की है, ताकि उपचुनाव की प्रक्रिया प्रभावित न हो।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट अब अपने वैकल्पिक विकल्पों के साथ चुनाव आयोग के अंतिम निर्णय का इंतजार करेगा। वहीं, दूसरे गुट की ओर से भी अपने विकल्प सौंपे जाने की संभावना है।

आने वाले दिनों में चुनाव आयोग इस मामले में आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। आयोग के अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार किस गुट को मिलेगा।

फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC का नाम और चुनाव चिह्न विवाद बड़ा मुद्दा बना हुआ है। उपचुनाव से पहले इस घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर बनी हुई है।

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