कोलकाता : कथित NEET प्रश्न पत्र लीक के विरोध में शुक्रवार को कोलकाता में हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा के मामले में पुलिस ने अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और हिंसा में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य वीडियो सबूतों की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर झड़प और हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और अब तक कुल 14 लोगों को हिरासत में लिया गया है। रविवार को पुलिस ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया, जिसके बाद गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 14 हो गई।
कोलकाता पुलिस ने बताया कि हिंसा के संबंध में सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। जांच अधिकारी अब घटनास्थल पर मौजूद वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल सबूतों के आधार पर उन लोगों की पहचान कर रहे हैं, जो हिंसा में शामिल थे।
एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, मामले की जांच में तकनीकी साक्ष्यों की भी मदद ली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा कैसे शुरू हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को हिंसा को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि झड़पों के पीछे "इस्लामिक कट्टरपंथी" थे और दावा किया कि उन्हें संभवत: विदेशी ताकतों का समर्थन हासिल था। हालांकि, पुलिस जांच में अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है।
हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हाल में लागू किए गए ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026’ का इस्तेमाल किया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाना है, जो सार्वजनिक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं।
इस कानून के तहत सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा मानी जाने वाली गतिविधियों में शामिल लोगों को 12 महीने तक एहतियातन हिरासत में रखने का प्रावधान है। इसके अलावा, ऐसी गतिविधियों से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने की व्यवस्था भी कानून में शामिल है।
राज्य सरकार की इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। जहां सरकार का कहना है कि हिंसा और असामाजिक गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण जरूरी है, वहीं विपक्ष कानून के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहा है।
NEET प्रश्न पत्र लीक के आरोपों को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों और संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को कोलकाता में भी प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो और केवल सबूतों के आधार पर ही आरोपियों की पहचान की जाए। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, यदि जांच के दौरान नए संदिग्धों की पहचान होती है।
NEET से जुड़े विवाद और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है। प्रशासन की कोशिश है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।