कोलकाता में TMC पार्षद गिरफ्तार, जबरन वसूली मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Update: 2026-06-07 05:23 GMT

West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली निराशाजनक हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लगातार राजनीतिक और संगठनात्मक संकट का सामना कर रही है। राज्यभर में पार्टी नेताओं के खिलाफ लोगों में बढ़ते असंतोष और आंतरिक अस्थिरता के बीच शनिवार रात कोलकाता में एक बड़ी पुलिस कार्रवाई सामने आई है।

कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 101 से टीएमसी पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है और मामले को लेकर टीएमसी पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पाटुली थाना पुलिस ने पहले बप्पादित्य दासगुप्ता को पूछताछ के लिए शनिवार को तलब किया था। पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों और शिकायतों के आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में उन पर जबरन वसूली से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

बताया जा रहा है कि यह मामला लंबे समय से जांच के दायरे में था और कुछ स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद पुलिस ने इसकी जांच तेज कर दी थी। आरोप है कि पार्षद के खिलाफ कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें दबाव बनाकर अवैध रूप से पैसे वसूलने की बात कही गई थी।

इस गिरफ्तारी के बाद कोलकाता नगर निगम और राजनीतिक गलियारों में तनाव का माहौल बन गया है। विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर टीएमसी पर निशाना साधा है और दावा किया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती जा रही है। वहीं, टीएमसी की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून के तहत निष्पक्ष जांच की जा रही है और यदि आरोप साबित होते हैं, तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान सभी संबंधित साक्ष्यों को ध्यान में रखा जाएगा और किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष और संगठनात्मक कमजोरियां बढ़ी हैं, जिसका असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। नेताओं पर लग रहे आरोप और लगातार हो रही गिरफ्तारियां पार्टी की छवि के लिए चुनौती बन सकती हैं।

इस घटना ने एक बार फिर कोलकाता की स्थानीय राजनीति को गर्मा दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और राजनीतिक बयानबाजी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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