पिथौरागढ़। पिथौरागढ़-बागेश्वर सीमा पर स्थित पौसा गांव में रविवार को कमस्यार घाटी के ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। नरगोली-बेरीनाग मोटर मार्ग के डामरीकरण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने करीब आठ किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई और सड़क पर खड़े होकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से सड़क की हालत खराब होने के कारण क्षेत्र के लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। लोगों ने कहा कि नरगोली-बेरीनाग मोटर मार्ग कमस्यार घाटी के कई गांवों को बेरीनाग से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसके बावजूद लंबे समय से सड़क का उचित डामरीकरण नहीं किया गया है। बरसात के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, कीचड़ और मलबा जमा हो जाता है, जिससे वाहनों का आवागमन जोखिम भरा हो जाता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सड़क के डामरीकरण और सुधार की दिशा में जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
आठ किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला
रविवार को पौसा गांव में आयोजित प्रदर्शन की खास बात करीब आठ किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला रही। ग्रामीण सड़क के किनारे एक-दूसरे का हाथ थामकर खड़े हुए और सड़क की बदहाली के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार और संबंधित विभाग से सड़क को जल्द दुरुस्त करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना था कि यह प्रदर्शन केवल सड़क निर्माण की मांग नहीं है, बल्कि क्षेत्र के लोगों की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा मुद्दा है। सड़क खराब होने का सीधा असर स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय व्यापार पर पड़ रहा है।
मरीजों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की खराब हालत का सबसे ज्यादा असर मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है। आपात स्थिति में किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। खराब सड़क के कारण वाहन धीमी गति से चलते हैं और कई बार रास्ते में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं तक समय पर पहुंचना हर नागरिक की जरूरत है, लेकिन सड़क की खराब स्थिति के कारण कई बार मरीजों को अस्पताल ले जाने में अतिरिक्त समय लग जाता है। बरसात में समस्या और गंभीर हो जाती है।
स्कूली बच्चों और नौकरी-पेशा लोगों की भी मुश्किलें
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि सड़क की स्थिति का असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ रहा है। रोजाना स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को खराब रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के दौरान कीचड़ और पानी जमा होने के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
नौकरी और अन्य कामों के लिए बेरीनाग या आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बेहतर होने से क्षेत्र के लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार से जुड़ने में आसानी होगी।
बरसात में बढ़ जाती है समस्या
ग्रामीणों के अनुसार, नरगोली-बेरीनाग मोटर मार्ग की स्थिति बरसात के दौरान सबसे ज्यादा खराब होती है। जगह-जगह गड्ढों में पानी भर जाता है और कीचड़ जमा हो जाती है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण कई स्थानों पर मलबा और पत्थर भी सड़क पर आ जाते हैं।
कई जगह पेड़ गिरने से यातायात बाधित होने की स्थिति बनती है। इससे ग्रामीणों को लंबे समय तक सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा। सड़क का स्थायी रूप से डामरीकरण और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम जरूरी हैं।
महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है नरगोली-बेरीनाग मोटर मार्ग
ग्रामीणों ने कहा कि नरगोली-बेरीनाग मोटर मार्ग कमस्यार घाटी के कई गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। यह मार्ग स्थानीय लोगों को बेरीनाग से जोड़ता है और रोजाना बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।
सड़क के बेहतर होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा। किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाना आसान हो सकता है। वहीं विद्यार्थियों और नौकरी-पेशा लोगों को भी समय की बचत होगी।
ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सड़क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने समस्या रखी गई, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उन्हें अभी तक स्थायी समाधान नहीं मिला है।
ग्रामीणों ने मांग की कि नरगोली-बेरीनाग मोटर मार्ग का जल्द डामरीकरण कराया जाए। इसके साथ ही बरसात के दौरान सड़क पर आने वाले मलबे और पत्थरों को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं। जहां पेड़ या चट्टान गिरने का खतरा है, वहां भी उचित व्यवस्था करने की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं होतीं, बल्कि वे लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं से जोड़ने वाली जीवनरेखा होती हैं। इसलिए इनकी अनदेखी सीधे ग्रामीणों के जीवन को प्रभावित करती है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आठ किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला के जरिए ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यदि जल्द सड़क के डामरीकरण को लेकर काम शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे वर्षों से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि सड़क की बदहाली के कारण क्षेत्र के लोगों को रोज परेशानी उठानी पड़ रही है और अब वे इसे और नजरअंदाज नहीं करेंगे।
पौसा गांव में रविवार को हुआ प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि कमस्यार घाटी के ग्रामीण सड़क की समस्या को लेकर संगठित हो रहे हैं। आठ किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी मांग को मजबूती से सामने रखा। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं और नरगोली-बेरीनाग मोटर मार्ग के डामरीकरण की दिशा में कब तक ठोस कार्रवाई शुरू होती है।