पिथौरागढ़ : वित्र कैलास मानसरोवर यात्रा पर निकला दूसरा दल मंगलवार को तिब्बत में प्रवेश कर तकलाकोट पहुंच गया। यात्रा के दौरान सुरक्षा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत भारतीय अधिकारियों ने लिपुपास सीमा पर यात्रियों को चीन के अधिकारियों को सौंपा। इसके बाद यात्रियों ने तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश किया और आगे की यात्रा पूरी करते हुए तकलाकोट पहुंचे।
जानकारी के अनुसार, दूसरा यात्रा दल मंगलवार सुबह नावीढांग से लिपुपास के लिए रवाना हुआ। नावीढांग से आगे बढ़ने के बाद यात्रियों ने भारत-तिब्बत सीमा के महत्वपूर्ण पड़ाव लिपुपास को पार किया। यहां पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के अधिकारियों ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर यात्रियों को चीन के अधिकारियों के हवाले किया।
सीमा पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुबह करीब नौ बजे यात्रा दल ने तिब्बत में प्रवेश किया। इसके बाद यात्री निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए तकलाकोट पहुंचे। अधिकारियों के अनुसार, दूसरा दल मंगलवार और बुधवार को तकलाकोट में प्रवास करेगा। यहां यात्री आगे की धार्मिक यात्रा के लिए जरूरी तैयारियां करेंगे।
कैलास मानसरोवर यात्रा के तहत तकलाकोट एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। यहां यात्रियों को ऊंचाई वाले क्षेत्र के मौसम और परिस्थितियों के अनुकूल होने का समय मिलता है। इसके बाद यात्री कैलास पर्वत और मानसरोवर झील की ओर आगे बढ़ते हैं।
वहीं, पहला यात्रा दल पहले ही तिब्बत पहुंच चुका है और वर्तमान में कैलास परिक्रमा कर रहा है। पहला दल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार धार्मिक स्थलों के दर्शन और परिक्रमा पूरी करने में जुटा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, यात्रा दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं।
इधर, तीसरा यात्रा दल भी आगे बढ़ चुका है। तीसरा दल धारचूला से रवाना होकर गुंजी पड़ाव पहुंच गया है। गुंजी यात्रा मार्ग का एक प्रमुख पड़ाव है, जहां से यात्रियों की आगे की यात्रा शुरू होती है। यहां यात्रियों के स्वास्थ्य और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जाती है।
कैलास मानसरोवर यात्रा हर साल आयोजित होने वाली सबसे कठिन और महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक है। समुद्र तल से काफी अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में होने के कारण इस यात्रा में यात्रियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए यात्रा के दौरान स्वास्थ्य जांच, सुरक्षा और मौसम की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
भारत सरकार, उत्तराखंड प्रशासन, आईटीबीपी और अन्य संबंधित एजेंसियां यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रही हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए मार्ग में चिकित्सा सहायता, भोजन और रहने की व्यवस्था भी की जाती है।
लिपुपास दर्रा भारत और तिब्बत के बीच यात्रा का महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां से होकर गुजरने वाले यात्रियों के लिए सीमा सुरक्षा और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पूरी की जाती है। आईटीबीपी के जवान पूरे मार्ग पर यात्रियों की सहायता और सुरक्षा में तैनात रहते हैं।
यात्रियों में कैलास मानसरोवर के दर्शन को लेकर खासा उत्साह है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कैलास पर्वत भगवान शिव का निवास माना जाता है और मानसरोवर झील को पवित्र माना जाता है। इसी आस्था के चलते देशभर से श्रद्धालु इस कठिन यात्रा में शामिल होते हैं।
इस साल भी यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। अलग-अलग दलों में यात्री तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं। प्रशासन लगातार सभी दलों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
फिलहाल दूसरा दल तकलाकोट में ठहरा हुआ है, जबकि पहला दल कैलास परिक्रमा पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और तीसरा दल भारतीय क्षेत्र में अपनी यात्रा जारी रखे हुए है। आने वाले दिनों में अन्य यात्रा दल भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तिब्बत की ओर रवाना होंगे।