Uttarakhand उत्तराखंड : उत्तराखंड में साइबर अपराधों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में एक वर्ष के भीतर साइबर ठगी के कुल 543 मामले दर्ज किए गए हैं, जो हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, सिक्किम और नागालैंड जैसे कई राज्यों की तुलना में अधिक बताए जा रहे हैं।
पुलिस और साइबर सेल द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, इन मामलों में 139 महिलाएं भी साइबर ठगी का शिकार हुई हैं। ठगों ने अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाया, जिनमें ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल, लिंक धोखाधड़ी और डिजिटल भुगतान से जुड़ी ठगी शामिल है।
राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई तेज की है। अब तक कुल 203 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन गिरफ्तारियों से कई बड़े साइबर गिरोहों का खुलासा हुआ है और जांच अभी भी जारी है।
अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठग लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को धोखा दे रहे हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना, तो कभी लॉटरी या इनाम का झांसा देकर लोगों से ओटीपी और बैंक डिटेल्स हासिल करना, ऐसे कई तरीके सामने आए हैं।
पुलिस ने बताया कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। खासकर डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ इस तरह के अपराधों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। कई मामलों में पीड़ितों को समय पर जानकारी न होने के कारण आर्थिक नुकसान ज्यादा हुआ है।
साइबर सेल द्वारा लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें। इसके साथ ही पुलिस ने बैंकिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध अब संगठित रूप ले चुका है और इसके लिए तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर मजबूत कार्रवाई की जरूरत है। राज्य में साइबर पुलिस यूनिट को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि मामलों की जांच तेजी से हो सके।
पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि आने वाले समय में साइबर सुरक्षा को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा, जिससे लोगों को जागरूक किया जा सके और ठगी की घटनाओं को कम किया जा सके।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में साइबर ठगी के बढ़ते मामले चिंता का विषय बने हुए हैं और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।