शांति कुंज में आदिवासी सम्मेलन, रंग-बिरंगे लोक नृत्यों ने मनाया 100 वर्ष का जश्न
Haridwar हरिद्वार: शांति कुंज, हरिद्वार में आयोजित ऑल वर्ल्ड गायत्री फैमिली के शताब्दी समारोह के अवसर पर देशभर से आए आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों और स्वयंसेवकों ने अपने पारंपरिक और रंग-बिरंगे लोक नृत्यों का शानदार प्रदर्शन किया। इस आदिवासी सम्मेलन का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता को उजागर करना और समुदायों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना था।
सम्मेलन में उपस्थित आदिवासी प्रतिनिधियों ने अपने परंपरागत वेशभूषा और संगीत के साथ लोक नृत्यों का आयोजन किया। भव्य मंच और सजावट ने कार्यक्रम को और आकर्षक बना दिया। दर्शक और श्रद्धालु उत्साहपूर्वक इन नृत्यों का आनंद लेते नजर आए। समारोह में उपस्थित आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रदर्शन के अलावा शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर भी जोर दिया गया। आयोजकों ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि आदिवासी समुदायों की समस्याओं और उनकी विशेषताओं के प्रति लोगों को जागरूक करना भी है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़े रखना इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
शांति कुंज में यह कार्यक्रम सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा प्रबंधों के साथ आयोजित किया गया। देशभर से आए आदिवासी स्वयंसेवकों ने अपने अनुभव और ज्ञान साझा किया। मंच पर लोक नृत्यों के दौरान विभिन्न आदिवासी जातियों की रंगीन परंपराओं और गीतों को प्रदर्शित किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक विविधता और एकता दोनों साथ-साथ बढ़ती हैं।
आयोजन में शामिल वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों से आदिवासी संस्कृति को मान्यता मिलती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश जाता है। उन्होंने युवा प्रतिभागियों को अपने लोक कला और नृत्य को आगे बढ़ाने और इसे राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।
समारोह के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और स्वयंसेवकों को धन्यवाद और सम्मान पत्र देकर उनके योगदान को सराहा। इस सम्मेलन ने यह भी स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज और संस्कृति देश की समृद्ध विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें संरक्षित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।