देहरादून: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान उत्तराखंड के अग्निवीरों के बीच पहुंचे हैं। दोनों वरिष्ठ अधिकारी अग्निवीरों से संवाद करेंगे और उनके प्रशिक्षण, सैन्य सेवा तथा भविष्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बातचीत करेंगे। इस कार्यक्रम को अग्निपथ योजना के तहत प्रशिक्षण ले रहे युवाओं के साथ शीर्ष सुरक्षा नेतृत्व के सीधे संवाद के रूप में देखा जा रहा है।

कार्यक्रम में अग्निवीरों को भारतीय सशस्त्र बलों में बदलती तकनीक, आधुनिक युद्ध की चुनौतियों, अनुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा में उनकी भूमिका के बारे में बताया जाएगा। NSA और CDS अग्निवीरों के प्रशिक्षण से जुड़े अनुभव भी जानेंगे। कार्यक्रम के दौरान अग्निवीरों को सवाल पूछने और अपनी बात रखने का अवसर मिलने की भी संभावना है।
अग्निपथ योजना के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना में युवाओं की भर्ती अग्निवीर के रूप में की जाती है। इस व्यवस्था में चयनित युवाओं की सेवा अवधि चार वर्ष निर्धारित है। मौजूदा नियमों के तहत प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को प्रदर्शन और सेवाओं की आवश्यकता के आधार पर नियमित कैडर में शामिल करने का प्रावधान है। उत्तराखंड का भारतीय सेना से पुराना और गहरा संबंध रहा है। राज्य के बड़ी संख्या में युवा सेना और अन्य सुरक्षा बलों में सेवा देते रहे हैं। ऐसे में यहां अग्निवीरों के साथ देश के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों का संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण व्यवस्था और भविष्य की सैन्य जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार करने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
CDS जनरल अनिल चौहान देश की तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त सैन्य क्षमता को मजबूत करने से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं NSA अजीत डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में केंद्र सरकार के प्रमुख सलाहकार हैं। दोनों अधिकारियों की मौजूदगी में होने वाला संवाद अग्निवीरों को राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था और बदलते सैन्य परिदृश्य को समझने का अवसर देगा। हाल के वर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर तकनीक, निगरानी प्रणाली और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। इसी के साथ सैनिकों के प्रशिक्षण में तकनीकी दक्षता और बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप कौशल पर भी जोर दिया जा रहा है।
अग्निपथ योजना की शुरुआत 2022 में की गई थी। योजना लागू होने के बाद भर्ती प्रक्रिया, चार वर्ष की सेवा अवधि और सेवा के बाद अग्निवीरों के भविष्य को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर बहस भी हुई है। केंद्र सरकार का कहना रहा है कि योजना का उद्देश्य सशस्त्र बलों को युवा प्रोफाइल देना और नई तकनीकी जरूरतों के अनुरूप मानव संसाधन तैयार करना है। उत्तराखंड में होने वाले इस संवाद में अग्निवीरों के अनुभव और उनके सवाल भी महत्वपूर्ण रहेंगे। कार्यक्रम के बाद बातचीत में उठे प्रमुख मुद्दों और वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से दिए गए संदेशों की विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
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