रामनगर। कार्बेट टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्रों में बाघ की सक्रियता ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गिरिजा मंदिर के मुख्य गेट के बाहर बाघ ने एक गाय को अपना शिकार बना लिया। इस घटना के बाद आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। वहीं, ढिकुली क्षेत्र में घोड़े का शिकार करने वाले बाघ की पहचान के लिए वन विभाग ने निगरानी तेज कर दी है।

वन विभाग ने ढिकुली क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाए हैं, ताकि जंगल से बाहर आकर आबादी क्षेत्र के नजदीक पहुंचने वाले बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। विभाग का उद्देश्य हमलावर बाघ की पहचान करना और उसके मूवमेंट की जानकारी जुटाना है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार को दोपहर करीब दो बजे कार्बेट टाइगर रिजर्व के जंगल से लगे ढिकुली क्षेत्र में आबादी के पास मैदान में मौजूद एक घोड़े पर बाघ ने हमला कर दिया था। बाघ घोड़े को जंगल की ओर खींचकर ले गया। मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाकर बाघ को भगाने का प्रयास किया, लेकिन वह घोड़े को छोड़कर नहीं गया।

घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि ढिकुली क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में आबादी और पर्यटन क्षेत्र के नजदीक बाघ की मौजूदगी सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है।

इसके बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी अभियान शुरू किया। विभागीय टीमों ने घटनास्थल के आसपास जांच की और बाघ की गतिविधियों का पता लगाने के लिए ट्रैप कैमरे लगाए।

इसी बीच गिरिजा मंदिर के मुख्य गेट के बाहर गाय का शिकार किए जाने की घटना सामने आने के बाद लोगों में और डर बढ़ गया है। धार्मिक और पर्यटन स्थल होने के कारण गिरिजा मंदिर क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है। ऐसे में बाघ की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग उठ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से जंगल से लगे क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ी है। कई बार बाघ और अन्य जंगली जानवर आबादी के करीब पहुंच जाते हैं, जिससे लोगों और मवेशियों पर खतरा बना रहता है।

वन विभाग अधिकारियों का कहना है कि लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे जंगल क्षेत्र के आसपास अकेले न जाएं और किसी भी वन्यजीव की सूचना तुरंत विभाग को दें।

अधिकारियों के अनुसार, ट्रैप कैमरों से बाघ की पहचान करने में मदद मिलेगी। यदि कैमरों में बाघ की तस्वीरें कैद होती हैं तो उसकी गतिविधियों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है। साथ ही स्थानीय लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे जंगल की सीमा के पास सावधानी बरतें और बाघ या अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर खुद से कोई कदम न उठाएं।

कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों की संख्या अधिक होने के कारण आसपास के इलाकों में उनकी आवाजाही सामान्य घटना है, लेकिन आबादी और पर्यटन क्षेत्रों के नजदीक उनकी मौजूदगी को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाती है।

ढिकुली क्षेत्र में घोड़े के शिकार के बाद वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि क्या यही बाघ गिरिजा मंदिर क्षेत्र में गाय के शिकार के लिए भी जिम्मेदार है या दोनों घटनाओं में अलग-अलग बाघ शामिल हैं।

फिलहाल वन विभाग की निगरानी जारी है और ट्रैप कैमरों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और वन विभाग के निर्देशों का पालन करें।

Tags: