देहरादून: उत्तराखंड में साहित्य प्रेमियों और पुस्तक प्रेमियों के लिए एक खास आयोजन होने जा रहा है। प्रदेश में जल्द ही ‘किताब कौतिक’ नाम से विशाल पुस्तक मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें करीब 80 हजार किताबें प्रदर्शित की जाएंगी। इस मेले का उद्देश्य लोगों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना और साहित्य, संस्कृति तथा ज्ञान की दुनिया से नई पीढ़ी को जोड़ना है।
‘किताब कौतिक’ के आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस मेले के लिए उत्तराखंड के एक प्रमुख शहर का चयन किया गया है, जहां बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमियों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन स्थल पर अलग-अलग विषयों की पुस्तकों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जिनमें साहित्य, इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं, बच्चों की किताबों और अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकों का संग्रह मौजूद रहेगा।
80 हजार किताबों का होगा संग्रह
आयोजकों के अनुसार, मेले में लगभग 80 हजार किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें देश-विदेश के लेखकों की पुस्तकें शामिल होंगी। पाठकों को एक ही जगह पर अलग-अलग विषयों की किताबें देखने और खरीदने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा मेले में लेखकों के साथ संवाद कार्यक्रम, पुस्तक विमोचन, साहित्यिक चर्चा और बच्चों के लिए विशेष गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा। इसका मकसद केवल किताबों की बिक्री नहीं, बल्कि पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करना है।
युवाओं और बच्चों पर रहेगा फोकस
आयोजकों का कहना है कि आज डिजिटल दौर में किताबों से जुड़ाव कम होता जा रहा है। ऐसे समय में इस तरह के आयोजन युवाओं और बच्चों को किताबों की अहमियत समझाने में मदद करेंगे। मेले में छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी किताबें, करियर मार्गदर्शन सामग्री और ज्ञानवर्धक साहित्य भी उपलब्ध रहेगा। बच्चों के लिए कहानी, चित्र पुस्तकें और रचनात्मक गतिविधियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
उत्तराखंड की संस्कृति को भी मिलेगी जगह
‘किताब कौतिक’ में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से जुड़ी पुस्तकों को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। स्थानीय लेखकों और साहित्यकारों को मंच उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि प्रदेश की साहित्यिक पहचान को आगे बढ़ाया जा सके। उत्तराखंड में पहले भी ऐसे पुस्तक मेले लोगों के बीच लोकप्रिय रहे हैं। किताब कौतिक के जरिए एक बार फिर पुस्तक प्रेमियों को ज्ञान और साहित्य से जुड़ने का अवसर मिलेगा। आयोजकों को उम्मीद है कि यह मेला बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करेगा और उत्तराखंड में पढ़ने की संस्कृति को नई दिशा देगा। 80 हजार किताबों के इस आयोजन को लेकर साहित्य जगत में भी उत्साह देखा जा रहा है।
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