देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी के दो महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला उनके पूर्व विशेष कार्याधिकारी यानी ओएसडी और करीबी सहयोगी चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के बाद सामने आया है। बताया गया है कि तलाशी के दौरान नकदी, सोने के सिक्कों, आभूषणों और महंगी घड़ियों सहित करीब 1.28 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई है।
हरीश रावत ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। वह इन दोनों पदों से हट रहे हैं क्योंकि नहीं चाहते कि उनके या उनके किसी सहयोगी के कारण भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई कमजोर पड़े।
रावत ने इस कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले उनके सहयोगी के घर पर छापेमारी करके एक राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का आगामी चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में उनके किसी काम या उनसे जुड़े विवाद के कारण पार्टी के संघर्ष को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए किसी सरकारी पद से इस्तीफा देने का प्रश्न नहीं उठता। उन्होंने केवल प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी की सदस्यता और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य की जिम्मेदारी छोड़ने की घोषणा की है। रावत के इस कदम को उत्तराखंड की राजनीति में बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है।
ईडी की यह कार्रवाई उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की वर्ष 2016 में आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ी है। जांच एजेंसी का आरोप है कि भर्ती परीक्षा के दौरान चुनिंदा उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के लिए ओएमआर शीट में कथित रूप से हेरफेर किया गया था। इस मामले में आयोग के तत्कालीन अधिकारियों और परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
छापेमारी के दौरान चंदन सिंह जीना के आवास से कथित तौर पर 32 लाख रुपये नकद, सोने के सिक्के, सोने की चेन और विभिन्न महंगे ब्रांड की घड़ियां बरामद की गईं। उनके और परिजनों के बैंक खातों में जमा करीब 52.16 लाख रुपये फ्रीज किए जाने की भी बात सामने आई है। नकदी, आभूषणों, घड़ियों और बैंक खातों की रकम को मिलाकर कार्रवाई का कुल मूल्य करीब 1.28 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में भी बरामद वस्तुओं और फ्रीज की गई रकम का विवरण दिया गया है।
चंदन सिंह जीना हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान वर्ष 2014 से 2017 तक उनके ओएसडी रहे थे। वर्तमान में भी उन्हें रावत का करीबी सहयोगी और निजी सहायक बताया जा रहा है। रावत ने अपने बयान में स्वीकार किया कि जीना ने उनके साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर काम किया है। उन्होंने जीना को सज्जन, विनम्र और मेहनती व्यक्ति बताते हुए उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अविश्वास जताया।
हरीश रावत ने कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि ग्राम सेवक भर्ती के दौरान उनके सहयोगी ने ओएमआर शीट में छेड़छाड़ की थी तो यह बेहद गंभीर और शर्मनाक होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि भर्ती मामलों में उनकी संलिप्तता का कोई प्रमाण किसी के पास है तो उसे सीबीआई, ईडी या राज्य की संबंधित एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति को गलत और अनुचित प्रलोभनों से बचना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन और अपने कार्यकाल में हुई भर्तियों का भी बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि आयोग का गठन प्रदेश के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उनकी सरकार ने लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षाएं कराने के लिए कहा और चिकित्सा तथा शिक्षा समेत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए भर्ती बोर्ड गठित किए।
रावत ने दावा किया कि उनके करीब तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां की गई थीं। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित नियुक्तियों में यदि उनसे कोई निर्णय संबंधी गलती हुई है तो वह इसके लिए प्रदेश की जनता से क्षमा मांगते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी अपराध में उनकी भूमिका का प्रमाण मिलता है तो कानून के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
हरीश रावत का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। कांग्रेस प्रदेश में सत्ता वापसी के लिए संगठन मजबूत करने और सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना रही है। हरीश रावत प्रदेश के सबसे अनुभवी कांग्रेस नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में पार्टी के दो अहम पदों से उनके हटने का संगठन और चुनावी रणनीति पर असर पड़ सकता है।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से यह साफ नहीं किया गया है कि हरीश रावत का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है या उस पर विचार किया जा रहा है। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षा से जुड़े मामले में ईडी की जांच आगे बढ़ रही है। जांच के निष्कर्ष और कांग्रेस नेतृत्व के निर्णय पर अब उत्तराखंड की सियासत की नजर बनी हुई है।