गोपेश्वर/देहरादून: उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ से देहरादून लौट रहे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद शनिवार, 31 अक्टूबर को दूसरे दिन भी घटनास्थल से संबंधित राहत और शवों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का अभियान जारी रहा। शुक्रवार को हुए इस हादसे में पायलट और पांच यात्रियों की मौत की जानकारी सामने आई है। दुर्घटना दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण अभियान में कठिनाइयां आ रही हैं। इस बीच, विमानन अधिकारियों की जांच और घटनास्थल के निरीक्षण से हादसे की परिस्थितियों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है। दुर्घटना का अंतिम कारण अभी घोषित नहीं हुआ है। 
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुक्रवार रात जारी आधिकारिक बयान में बताया कि दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर का संचालन ट्रांसभारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड कर रही थी। उसका पंजीकरण नंबर वीटी-एचसीएक्स और प्रकार एएस350बी3 था। मंत्रालय के अनुसार, हेलीकॉप्टर जोशीमठ के निकट चाई गांव के जंगल वाले क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। बयान में मलबे का स्थान मिल जाने और खोज एवं बचाव अभियान जारी रहने की जानकारी दी गई थी। इससे दुर्घटना के स्थान और विमान की पहचान की आधिकारिक पुष्टि होती है, लेकिन हादसा किस वजह से हुआ, इसका निष्कर्ष बयान में नहीं दिया गया। 
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, हेलीकॉप्टर ने 30 अक्टूबर को दोपहर एक बजकर 14 मिनट पर बदरीनाथ हेलीपैड से उड़ान भरी थी। उसे देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड पहुंचना था। इसमें एक पायलट और पांच यात्री सवार थे। उड़ान का गंतव्य स्पष्ट होने से शुरुआती खबरों में सामने आई अलग-अलग जानकारियों के बीच स्थिति साफ हुई है। मंत्रालय ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए की टीम को प्रारंभिक और नियामकीय आकलन के लिए देहरादून भेजने की भी पुष्टि की। इस आकलन से संबंधित निष्कर्ष जारी होने का इंतजार है। शनिवार सुबह प्रकाशित स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, राहत टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई। एसडीआरएफ और पुलिस प्रशासन की टीमों के सामने दुर्गम रास्तों से शवों को नीचे लाने की चुनौती थी। रिपोर्ट में बताया गया कि शुक्रवार को अंधेरा होने और कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण अभियान प्रभावित हुआ था। ऐसे स्थानों पर घटनास्थल की पहचान हो जाना और वहां से सभी आवश्यक कार्य पूरे कर लेना अलग-अलग चरण होते हैं। यही वजह है कि हादसे की पुष्टि के बाद भी राहत दलों का अभियान अगले दिन तक जारी रहा। 
शवों की बरामदगी और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने को लेकर प्रकाशित खबरों में अलग-अलग स्थिति बताई गई है। शुक्रवार देर रात की एक रिपोर्ट में सभी छह शव मिलने की जानकारी दी गई, जबकि शनिवार सुबह की खबर में उन्हें नीचे लाने के लिए टीमों के रवाना होने का उल्लेख है। इसलिए अभियान जारी होने का अर्थ यात्रियों के अब भी लापता होने से नहीं लगाया जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, आगे का काम कठिन इलाके से शवों को सड़क मार्ग से जुड़े सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने से संबंधित था।  स्थानीय खबर में शनिवार को डीजीसीए और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम के दुर्घटनास्थल पर पहुंचने का कार्यक्रम बताया गया है। मृतकों के परिजनों के भी क्षेत्र में पहुंचने की जानकारी दी गई। हालांकि, टीम के पहुंचने या निरीक्षण शुरू होने को उसी दिन हादसे का अंतिम कारण सामने आने की गारंटी नहीं माना जा सकता। अभी उपलब्ध सूचना जांच की तैयारी और प्रारंभिक कार्रवाई से जुड़ी है। किसी तकनीकी निष्कर्ष की घोषणा होने पर ही स्पष्ट होगा कि दुर्घटना के पीछे कौन-सी परिस्थितियां जिम्मेदार थीं। 
पुलिस के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में पायलट की पहचान कैप्टन हिमांशु सभरवाल के रूप में बताई गई है। पांचों यात्रियों के कर्नाटक निवासी होने की जानकारी भी सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। दुर्घटना के बाद पुलिस, एसडीआरएफ और सेना की संयुक्त टीमें अभियान में जुटी थीं। रिपोर्ट में उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के हवाले से बताया गया कि एहतियातन ट्रांसभारत एविएशन के पूरे बेड़े की उड़ानें रोक दी गई हैं। यह कदम जांच के अंतिम निष्कर्ष से अलग सावधानी संबंधी कार्रवाई है।  हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सामान्य यात्रा के लिए रवाना हुआ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त कैसे हुआ। फिलहाल आधिकारिक बयान में मौसम, इंजन, अन्य तकनीकी प्रणाली या पायलट की किसी कार्रवाई को कारण नहीं बताया गया है। ऐसे में किसी एक संभावना को पुख्ता वजह के रूप में पेश करना जल्दबाजी होगी। दुर्घटना के बाद सामने आने वाली शुरुआती सूचनाएं घटनाक्रम समझने में मदद करती हैं, लेकिन वे अपने आप में जांच का विकल्प नहीं हैं। यात्रियों और पायलट के परिवारों के लिए भी प्रमाणित जानकारी का सामने आना महत्वपूर्ण है।
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