चमोली। नीति घाटी के तमक नाले में बादल फटने के बाद लापता हुए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के हवलदार पंकज की तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। घटना के बाद से ही विभिन्न सुरक्षा और राहत एजेंसियां जवान की तलाश में जुटी हैं। बुधवार को सर्च ऑपरेशन को और तेज किया गया। मलबे और बड़े-बड़े पत्थरों के बीच रेस्क्यू टीमों ने अभियान चलाया, वहीं धौली नदी के किनारे भी लगातार तलाशी ली जा रही है।
लापता जवान का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और भारी मलबे के कारण रेस्क्यू टीमों के सामने चुनौती बनी हुई है। इसके बावजूद जवान की तलाश में अभियान को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। घटनास्थल पर मौजूद दल संभावित स्थानों को चिह्नित कर एक-एक हिस्से की जांच कर रहे हैं।
बादल फटने की घटना के बाद तमक नाले में अचानक भारी मात्रा में पानी, मलबा और पत्थर आने से आसपास का इलाका प्रभावित हुआ। तेज बहाव अपने साथ बड़ी मात्रा में मलबा लेकर आया, जिससे कई स्थानों पर जमीन और रास्ते भी प्रभावित हुए। इसी मलबे में हवलदार पंकज के दबे या बहने की आशंका को देखते हुए रेस्क्यू टीमें लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।
मलबा हटाकर की जा रही तलाश
रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे की मोटी परत है। जवानों और राहतकर्मियों की टीम मशीनों तथा अन्य उपलब्ध संसाधनों की मदद से मलबा हटाकर संभावित स्थानों की जांच कर रही है। बड़े पत्थरों और कीचड़ के बीच किसी भी सुराग की संभावना को देखते हुए सावधानी से तलाशी ली जा रही है। मलबे का एक हिस्सा हटाने के बाद वहां दोबारा गहन जांच की जा रही है, ताकि लापता जवान के बारे में कोई जानकारी मिल सके।
अभियान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवान भी शामिल हैं। इनके साथ गढ़वाल स्काउट की डॉग स्क्वाड टीम को भी सर्च ऑपरेशन में लगाया गया है। प्रशिक्षित श्वान दल मलबे और पत्थरों के बीच संभावित स्थानों को तलाश रहा है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में डॉग स्क्वाड की मदद से उन जगहों की भी जांच की जा रही है, जहां सामान्य तौर पर पहुंचना मुश्किल है।
धौली नदी के किनारे भी सर्च
मलबे वाले क्षेत्र के अलावा धौली नदी के किनारे भी जवान की तलाश की जा रही है। रेस्क्यू दल नदी के किनारे संभावित स्थानों की जांच कर रहे हैं। हादसे के दौरान पानी के तेज बहाव की स्थिति को देखते हुए नदी के आसपास के क्षेत्रों को भी सर्च अभियान में शामिल किया गया है।
तलाशी अभियान को इस तरह चलाया जा रहा है कि मलबे वाले क्षेत्र के साथ-साथ पानी के संभावित बहाव वाले रास्तों की भी जांच हो सके। रेस्क्यू टीमों का प्रयास है कि घटनास्थल से लेकर धौली नदी के किनारे तक किसी भी संभावित सुराग को नजरअंदाज न किया जाए।
दुर्गम क्षेत्र में अभियान बड़ी चुनौती
नीति घाटी का भौगोलिक क्षेत्र बेहद दुर्गम है। पहाड़ी ढलानों, संकरे रास्तों, मलबे और नदी के तेज बहाव के बीच सर्च ऑपरेशन चलाना आसान नहीं है। मौसम में बदलाव और लगातार पहाड़ी क्षेत्र में बने रहने वाले खतरे के बीच रेस्क्यूकर्मियों को सावधानी से आगे बढ़ना पड़ रहा है। इसके बावजूद जवान की तलाश में जुटी टीमें लगातार अभियान जारी रखे हुए हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल जवान संभावित स्थानों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर जांच कर रहे हैं। जहां मलबा अधिक है, वहां पहले उसे हटाने का काम किया जा रहा है। इसके बाद डॉग स्क्वाड की मदद से दोबारा सर्च किया जा रहा है। नदी के किनारे भी टीमों को अलग-अलग हिस्सों में भेजकर तलाशी ली जा रही है।
परिजनों और साथियों को तलाश पूरी होने की उम्मीद
हवलदार पंकज के लापता होने के बाद उनके परिजन और साथी लगातार उनके सकुशल मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। राहत और बचाव दलों की प्राथमिकता भी लापता जवान का पता लगाना है। सर्च ऑपरेशन में शामिल टीमें उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए लगातार संभावित स्थानों की जांच कर रही हैं।
प्रशासन और राहत एजेंसियों की ओर से अभियान को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जैसे-जैसे मलबे वाले क्षेत्रों की जांच पूरी हो रही है, वैसे-वैसे तलाशी का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। धौली नदी के किनारे सर्च अभियान जारी रहने से नदी के बहाव क्षेत्र में भी किसी सुराग के मिलने की उम्मीद बनी हुई है।
फिलहाल हवलदार पंकज का कोई पता नहीं चल पाया है। तमक नाले में बादल फटने की घटना के बाद शुरू हुआ यह सर्च ऑपरेशन अब भी पूरी गंभीरता के साथ जारी है। एनडीआरएफ, गढ़वाल स्काउट की डॉग स्क्वाड और अन्य रेस्क्यू दल मलबे, पत्थरों और नदी किनारे लगातार जवान की तलाश में जुटे हैं।