Haridwar हरिद्वार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री Kailash Vijayvargiya की टिप्पणी पर जारी चर्चा के बीच उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर Karoli Shankar Maharaj ने उनका बचाव किया है। उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय का बयान किसी दुर्भावना या विरोध की भावना से प्रेरित नहीं था, बल्कि इसे परिवार के भीतर सुधार और आत्ममंथन की भावना के रूप में देखा जाना चाहिए।
हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान करौली शंकर महाराज ने कहा कि जब किसी परिवार, संगठन या संस्था में कोई कमी दिखाई देती है, तो उसके सदस्य ही उस विषय को सामने लाकर सुधार का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय ने भी इसी पारिवारिक भावना के तहत अपनी बात रखी है और उनके बयान को किसी विवाद या टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
महामंडलेश्वर ने कहा कि किसी भी बड़े संगठन की मजबूती उसकी आत्मसमीक्षा और सुधार की क्षमता में होती है। यदि संगठन के भीतर के लोग समय-समय पर अपनी चिंताओं और सुझावों को रखते हैं, तो इससे व्यवस्था और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संगठन की आलोचना करना नहीं था, बल्कि रचनात्मक सुधार की दिशा में विचार रखना था।
करौली शंकर महाराज ने यह भी कहा कि समाज और राष्ट्रहित में कार्य करने वाले संगठनों को समय के साथ बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के विचार-विमर्श से संगठनात्मक मजबूती बढ़ेगी और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। गौरतलब है कि कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी। अब संत समाज की ओर से आए इस बयान को भी इस बहस में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।