उत्तराखंड में सड़क हादसों के घायलों को मिलेगा तत्काल ट्रॉमा इलाज
बड़ी खबर
Dehradun. देहरादून। सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखंड सरकार ने आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राज्य में एकीकृत और प्रभावी आपातकालीन व्यवस्था विकसित करने को लेकर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में सड़क हादसों में घायल व्यक्तियों को गोल्डन ऑवर के दौरान तत्काल उपचार उपलब्ध कराने, आपातकालीन सेवाओं के बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती समय घायल व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में पुलिस, फायर सर्विस, मेडिकल सहायता और एम्बुलेंस सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। इसी उद्देश्य से सभी आपातकालीन हेल्पलाइन सेवाओं को एकीकृत आपातकालीन नंबर 112 से तकनीकी और परिचालन स्तर पर जोड़े जाने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सभी हेल्पलाइन सेवाओं के एकीकरण के बाद आम नागरिक को अलग-अलग नंबर याद रखने की आवश्यकता नहीं होगी। किसी भी आपात स्थिति में 112 नंबर पर कॉल करने से पुलिस सहायता, अग्निशमन सेवा और मेडिकल सुविधा तुरंत उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके लिए ऐसा ऑटोमैटिक मैकेनिज्म विकसित करने पर जोर दिया गया है, जिसमें बिना मानवीय हस्तक्षेप के कॉल की प्राथमिकता तय हो और संबंधित विभाग को तत्काल सूचना पहुंच जाए।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएं। साथ ही नई व्यवस्था के बारे में आम लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि आपातकालीन सेवाओं की जानकारी हर नागरिक तक पहुंचनी चाहिए, ताकि दुर्घटना या अन्य आपात परिस्थितियों में लोग तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।
बैठक में गुड सेमेरिटन यानी सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले आम नागरिकों के लिए शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने राज्य स्तर पर डीजी हेल्थ को नोडल अधिकारी और जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुड सेमेरिटन से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा के लिए हर महीने बैठक आयोजित की जाए और बैठकों की कार्यवाही रिपोर्ट संबंधित पोर्टल पर अपलोड की जाए।
मुख्य सचिव ने एम्बुलेंस सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य में संचालित सभी सरकारी और निजी एम्बुलेंस में एआईएस-125 मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा सभी एम्बुलेंस में जीपीएस और वीएलटीडी उपकरण लगाए जाएं, ताकि उनकी वास्तविक स्थिति की जानकारी समय पर मिल सके। उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस की निगरानी व्यवस्था को हेल्पलाइन 112 से रियल टाइम इंटीग्रेट किया जाना चाहिए, जिससे जरूरत पड़ने पर सबसे नजदीकी एम्बुलेंस को तुरंत घटनास्थल पर भेजा जा सके।
बैठक में ट्रॉमा रजिस्ट्री को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में ट्रॉमा रजिस्ट्री तैयार करने के लिए परिवहन विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। परिवहन विभाग राज्य स्तरीय ट्रॉमा रजिस्ट्री स्थापित करेगा, जिसमें सभी सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों को जोड़ा जाएगा। इस रजिस्ट्री को राष्ट्रीय ट्रॉमा रजिस्ट्री से भी जोड़ा जाएगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़ों का बेहतर विश्लेषण किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि ट्रॉमा रजिस्ट्री के माध्यम से दुर्घटनाओं के कारण, घायलों की स्थिति, उपचार व्यवस्था और मृत्यु दर जैसी जानकारियां एकत्र की जा सकेंगी। इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य में सड़क सुरक्षा और चिकित्सा सेवाओं को और प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और वहां जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने में भी मदद मिलेगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रधानमंत्री राहत योजना (PM-RAHAT) के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचना चाहिए। सड़क दुर्घटना पीड़ितों को आर्थिक और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, पुलिस विभाग, आपदा प्रबंधन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने, तकनीकी संसाधनों के उपयोग और दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर सहमति जताई। उत्तराखंड सरकार की इस पहल का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करना और घायलों को कम से कम समय में बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। 112 हेल्पलाइन के माध्यम से सभी आपात सेवाओं का एकीकरण होने के बाद दुर्घटना के समय प्रतिक्रिया प्रणाली पहले से अधिक तेज और प्रभावी होने की उम्मीद है। इससे राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आम नागरिकों को आपात स्थिति में तत्काल सहायता मिल सकेगी।