रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ-बासुकीताल-आडिन कोल ट्रेक पर निकला पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल लापता हो गया है। यह दल 25 सितंबर को ट्रेकिंग के लिए रवाना हुआ था और आडिन कोल होते हुए गंगोत्री की ओर जाना था। खराब मौसम, वर्षा और बर्फबारी के बीच दल का अपने परिजनों से संपर्क टूट गया, जिसके बाद उनके लापता होने की जानकारी सामने आई।

जिला प्रशासन ने मंगलवार से दल की तलाश के लिए हवाई सर्च अभियान शुरू किया, लेकिन पहले दिन कोई सफलता नहीं मिली। बुधवार सुबह से एक बार फिर हेलीकॉप्टर की मदद से ट्रेकिंग दल के सदस्यों की तलाश की जा रही है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि लापता दल में 40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार के अमित फर्सवाण, 40वीं वाहिनी पीएसी रुद्रप्रयाग के नवीन रावत, उत्तरकाशी के फॉरेस्टर प्रवेश चौहान, विवेक और केदारनाथ पशुपालन विभाग में तैनात संजय सिंह रावत शामिल हैं।

प्रशासन के मुताबिक पांचों सदस्य अनुभवी ट्रेकिंग मार्ग पर आगे बढ़े थे, लेकिन ऊंचाई वाले इलाके में अचानक मौसम खराब होने के कारण संपर्क प्रभावित हो सकता है। लगातार वर्षा और बर्फबारी से इलाके में दृश्यता कम हो गई है और कई जगह रास्ते भी कठिन हो गए हैं।

ट्रेकिंग दल के परिजनों ने जब निर्धारित समय तक संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी प्रशासन को दी, तब खोज अभियान शुरू किया गया। प्रशासन ने पहले मोबाइल संपर्क और संभावित मार्गों के आधार पर लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।

इसके बाद हेलीकॉप्टर से हवाई निगरानी शुरू की गई। मंगलवार को कई संवेदनशील और संभावित स्थानों पर खोज की गई, लेकिन लापता सदस्यों का कोई सुराग नहीं मिला। खराब मौसम भी सर्च ऑपरेशन में बाधा बना।

बुधवार सुबह मौसम में कुछ सुधार होने के बाद फिर से हेलीकॉप्टर को अभियान में लगाया गया। टीम उन सभी संभावित ट्रेकिंग रूटों, घाटियों और ऊंचाई वाले इलाकों को खंगाल रही है, जहां दल के फंसे होने की आशंका है।

केदारनाथ-बासुकीताल-आडिन कोल मार्ग कठिन और ऊंचाई वाला ट्रेक माना जाता है। इस रास्ते पर मौसम तेजी से बदल सकता है और बर्फबारी की स्थिति में मार्ग पहचानना भी मुश्किल हो सकता है। ऊंचाई पर मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता भी सीमित रहती है, जिससे आपात स्थिति में संपर्क करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

प्रशासन ने संभावना जताई है कि दल किसी सुरक्षित स्थान पर रुका हो सकता है या खराब मौसम के कारण आगे नहीं बढ़ पाया हो। हालांकि फिलहाल इस बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है।

लापता सदस्यों के पास ट्रेकिंग से जुड़ा जरूरी सामान और उपकरण होने की संभावना है, लेकिन लंबा समय बीतने के कारण चिंता बढ़ती जा रही है। परिजन लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं और खोज अभियान की जानकारी ली जा रही है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थानीय स्तर पर भी संभावित संपर्क बिंदुओं और रास्तों की जानकारी जुटानी शुरू की है। यदि मौसम और भूगोल की स्थिति अनुमति देती है तो जमीनी टीमों को भी खोज अभियान में शामिल किया जा सकता है।

ट्रेकिंग मार्ग के कई हिस्से बर्फ और पत्थरों से ढके होने के कारण पैदल खोज अभियान काफी जोखिम भरा हो सकता है। यही कारण है कि फिलहाल हेलीकॉप्टर से बड़े इलाके की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है।

जिला प्रशासन का कहना है कि सर्च ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक दल के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल जाती। हेलीकॉप्टर से संभावित कैंप साइट, ग्लेशियर के किनारे, चट्टानी हिस्सों और ट्रेल रूट पर लगातार निगरानी की जा रही है।

ट्रेकिंग दल में शामिल सदस्य अलग-अलग विभागों से जुड़े हैं। इनमें पीएसी के दो जवान, वन विभाग से जुड़े अधिकारी और पशुपालन विभाग में तैनात कर्मचारी शामिल हैं। इससे प्रशासनिक स्तर पर भी खोज अभियान को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

खराब मौसम उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में ट्रेकिंग के दौरान बड़ी चुनौती बनता है। सितंबर के आखिरी दिनों में अचानक बर्फबारी और तापमान में गिरावट से यात्रियों और ट्रेकर्स को अतिरिक्त जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञ अक्सर ऊंचाई वाले ट्रेक पर निकलने से पहले मौसम की स्थिति, स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी, संपर्क साधनों और आपातकालीन उपकरणों की पूरी तैयारी करने की सलाह देते हैं।

इस मामले में प्रशासन फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि दल आखिरी बार किस स्थान तक पहुंचा था और उसके बाद उनकी गतिविधि क्या रही। मोबाइल लोकेशन, पूर्व निर्धारित रूट और स्थानीय जानकारों से मिली सूचनाओं को भी खंगाला जा रहा है।

परिजनों की चिंता लगातार बढ़ रही है। परिवारों को उम्मीद है कि सभी सदस्य सुरक्षित होंगे और जल्द उनका पता लगाया जाएगा। प्रशासन भी खोज अभियान में उपलब्ध संसाधनों का पूरा इस्तेमाल कर रहा है।

फिलहाल बुधवार को भी हेलीकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन जारी है। मौसम की स्थिति और दृश्यता के अनुसार अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती जल्द से जल्द ट्रेकिंग दल तक पहुंचना और उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाना है।

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