उत्तराखंड में मॉनसून का कहर जारी, भारी बारिश और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित

Update: 2026-07-30 03:52 GMT

देहरादून। उत्तराखंड में मॉनसून का प्रकोप लगातार जारी है। राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे सड़क संपर्क बाधित हो रहा है और लोगों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार के लिए राजधानी देहरादून सहित पांच जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में अगले कुछ घंटों के दौरान तेज बारिश जारी रहने की संभावना है। विशेष रूप से देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और नैनीताल जिलों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

लगातार बारिश के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी असर पड़ा है। बदरीनाथ हाईवे के समीप एक पहाड़ी से अचानक भूस्खलन होने के कारण मार्ग पर मलबा और बड़े पत्थर आ गए। इससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। सूचना मिलते ही सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है, क्योंकि बारिश के चलते दोबारा भूस्खलन की आशंका बनी हुई है।

वहीं, राहत की बात यह है कि मंगलवार से भूस्खलन के कारण बंद पड़ा यमुनोत्री हाईवे अब यातायात के लिए खोल दिया गया है। लगातार दो दिनों तक सड़क पर मलबा जमा रहने के कारण चारधाम यात्रा प्रभावित हुई थी और कई यात्री रास्ते में फंस गए थे। सड़क खुलने के बाद प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही नियंत्रित तरीके से शुरू कराई है। अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

चारधाम यात्रा के दौरान खराब मौसम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई स्थानों पर पहाड़ों से पत्थर गिरने और सड़क धंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में पुलिस, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल (एनडीआरएफ) और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से हालात पर नजर बनाए हुए हैं। संवेदनशील मार्गों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

बारिश का असर केवल पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। लगातार हो रही वर्षा और ऊपरी इलाकों से आ रहे पानी के कारण नदी उफान पर है। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। घाटों पर लोगों की आवाजाही सीमित की गई है और कई स्थानों पर सुरक्षा बैरिकेड लगाए गए हैं। जलस्तर बढ़ने से स्थानीय लोगों और व्यापारियों में भी चिंता का माहौल है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में राहत एवं बचाव दलों को पहले से तैनात किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। जिला प्रशासनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतें और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार हो रही बारिश के कारण छोटी नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। इससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी-नालों के किनारे जाने से बचें, पहाड़ी मार्गों पर अनावश्यक यात्रा न करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड का भौगोलिक स्वरूप अत्यंत संवेदनशील है और लगातार होने वाली भारी वर्षा से भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते सतर्कता बरतना और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना ही सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।

फिलहाल पूरे राज्य में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। मौसम विभाग की चेतावनी और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए राहत एवं बचाव एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं। आने वाले दिनों में यदि वर्षा का दौर जारी रहता है तो सड़क संपर्क, चारधाम यात्रा और सामान्य जनजीवन पर इसका और अधिक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने नागरिकों से संयम बरतने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की अपील की है।

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