देहरादून: उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित मदरसों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य में नई अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मदरसों की जांच की जा रही है, जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता नहीं ली है या जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। ऊधमसिंह नगर के बाजपुर में बुधवार को नौ गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को सील किया गया।

राज्य सरकार ने साफ किया है कि तय मानकों और मान्यता के बिना संचालित होने वाले संस्थानों को नियमों का पालन करना होगा। प्रशासन प्रदेशभर में ऐसे मदरसों का निरीक्षण करने की तैयारी में है।
बाजपुर में नौ मदरसे सील
ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर क्षेत्र में प्रशासन ने बुधवार को नौ मदरसों को सील किया। अधिकारियों के अनुसार निरीक्षण के दौरान इन संस्थानों के प्रबंधन जरूरी मान्यता और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इससे पहले रुद्रपुर में भी गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। लगातार हो रही कार्रवाई के बाद अन्य संस्थानों के दस्तावेजों की जांच भी तेज कर दी गई है।
प्रदेशभर में चलेगा निरीक्षण अभियान
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक तय मानकों को पूरा नहीं करने वाले मदरसों का प्रदेशभर में निरीक्षण किया जाएगा। जांच में देखा जाएगा कि संस्थान के पास आवश्यक मान्यता है या नहीं और वह नई व्यवस्था में निर्धारित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक मानकों का पालन कर रहा है या नहीं।
1 जुलाई से लागू हुई नई व्यवस्था
उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा की व्यवस्था में एक जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव किया गया है। पुरानी उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड व्यवस्था समाप्त कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत नया ढांचा लागू किया गया। नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर मान्यता लेनी होगी। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य धार्मिक शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
452 मदरसे थे पहले पंजीकृत
पुरानी व्यवस्था में राज्य में 452 मदरसे पंजीकृत बताए गए हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन संस्थानों को निर्धारित मान्यता प्रक्रिया से गुजरना है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक करीब 200 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। आवेदन करने वाले संस्थानों का स्पॉट सर्वे और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान भी बताए गए हैं जिन्होंने अभी तक आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में मान्यता नहीं लेने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मान्यता नहीं ली तो हो सकती है कार्रवाई
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि राज्य में संचालित मदरसों को विधिवत मंजूरी और निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। सरकार का कहना है कि नियम सभी संस्थानों के लिए समान रूप से लागू होंगे। मान्यता की प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले संस्थानों को अनिश्चित समय तक बिना अनुमति संचालन की छूट नहीं दी जाएगी।
आधुनिक शिक्षा पर सरकार का जोर
नई व्यवस्था के पीछे सरकार आधुनिक शिक्षा को भी प्रमुख कारण बता रही है। प्राधिकरण का कहना है कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ विज्ञान, गणित और तकनीक जैसे विषयों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को मिलने वाले प्रमाणपत्र और मार्कशीट की कानूनी वैधता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। प्राधिकरण का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल संस्थानों को बंद करना नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को निर्धारित मानकों के अनुरूप लाना और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करना है।
दस्तावेजों की हो रही जांच
प्रशासन की टीम मदरसों की मान्यता से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। जिन संस्थानों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं, उन्हें नोटिस देने या सील करने जैसी कार्रवाई की जा रही है। बाजपुर में नौ मदरसों की सीलिंग के बाद यह साफ है कि आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी निरीक्षण और कार्रवाई जारी रह सकती है। फिलहाल सरकार और राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का फोकस सभी संबंधित संस्थानों को नई व्यवस्था के दायरे में लाने पर है। मान्यता के लिए आवेदन करने वाले संस्थानों की जांच के बाद नियमों और मानकों को पूरा करने पर उन्हें मान्यता दी जाएगी, जबकि प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
Tags: