पौड़ी: उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में गुलदार के हमले से एक मासूम बच्ची की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार, 3 नवंबर की शाम जिला मुख्यालय से सटे ओजली गांव में घर के आंगन में खेल रही बच्ची को गुलदार उठाकर ले गया। परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश की, लेकिन कुछ दूरी पर झाड़ियों में उसका शव मिला। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। मौके पर पहुंचे पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी को भी लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। मृत बच्ची की पहचान कृष्ण कुमार की पुत्री आरुषि के रूप में हुई है। स्थानीय रिपोर्टों में उसकी उम्र चार से पांच वर्ष के बीच बताई गई है। बताया जा रहा है कि आरुषि खांड्यूंसैंण क्षेत्र के ओजली गांव में अपनी नानी के घर रह रही थी। मंगलवार शाम करीब छह बजे वह घर के पास खेल रही थी। इसी दौरान घात लगाकर बैठे गुलदार ने उस पर हमला कर दिया और उसे जबड़ों में दबाकर झाड़ियों की तरफ ले गया।
इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि आरुषि के सात वर्षीय भाई आर्यन ने अपनी बहन को गुलदार के कब्जे में जाते देखा। उसने तत्काल परिवार के लोगों को इसकी जानकारी दी। बच्ची की नानी पूनम देवी शोर सुनकर घर से बाहर निकलीं और आरुषि को खोजने के लिए दौड़ पड़ीं। परिजन और ग्रामीण भी बच्ची की तलाश में जुट गए। करीब 100 मीटर दूर झाड़ियों में आरुषि का शव मिला। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मासूम की मौत की जानकारी मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। मां बबीता देवी और नानी पूनम देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इलाके में लंबे समय से गुलदार की आवाजाही बनी हुई है। इसके बावजूद लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। मासूम की मौत से आक्रोशित लोगों ने वन मंत्री सुबोध उनियाल के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने मांग की कि वन मंत्री स्वयं प्रभावित इलाके में पहुंचें और लगातार बढ़ रहे वन्यजीव हमलों की समस्या का स्थायी समाधान करें।
इस दौरान मौके पर पहुंचे भाजपा विधायक राजकुमार पोरी को भी लोगों ने घेर लिया। ग्रामीणों का कहना था कि हर घटना के बाद आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन गुलदार के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। स्थानीय लोगों का आक्रोश इतना अधिक था कि विधायक के सामने भी ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। विधायक की गाड़ी पर एक बुजुर्ग महिला के चढ़ने की बात भी सामने आई है, हालांकि इस विशेष घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने मांग की कि हमलावर गुलदार को जल्द पकड़ा जाए और प्रभावित इलाके में निगरानी बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि गुलदार की बढ़ती गतिविधियों के कारण बच्चों का घर से बाहर निकलना भी असुरक्षित हो गया है। शाम होते ही लोगों को अपने घरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
वन विभाग की उप प्रभागीय अधिकारी आयशा बिष्ट के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलने के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची। क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जा रही है और गुलदार की गतिविधियों पर निगरानी रखने के उपाय किए जा रहे हैं। हमलावर गुलदार को आदमखोर घोषित करने के लिए प्रस्ताव भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है। इसी दिन पौड़ी जिले में गुलदार के हमले की एक अन्य घटना भी सामने आई। कोटद्वार के सनेह मल्ली क्षेत्र में एक आठ वर्षीय बच्ची पर गुलदार ने हमला किया। बच्ची की मां ने साहस दिखाते हुए गुलदार का पीछा किया और अपनी बेटी को उसके कब्जे से छुड़ाया। घायल बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। एक ही दिन हुई इन दोनों घटनाओं ने पौड़ी जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में गुलदार की बढ़ती गतिविधियों के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। लोगों ने वन विभाग से नियमित गश्त, संवेदनशील इलाकों में कैमरे लगाने और ग्रामीणों को समय पर सतर्क करने की मांग की है।
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