ऋषिकेश में किशोरी से दुष्कर्म साक्ष्य मिटाने वाला दोस्त फरार
पहचान छिपाकर किशोरी से दुष्कर्म
ऋषिकेश: उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक किशोरी से कथित दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि युवक ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर किशोरी से संपर्क बढ़ाया और उसे अपने झांसे में लिया। इसके बाद किशोरी के साथ दुष्कर्म किया गया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। साथ ही घटना से जुड़े साक्ष्य मिटाने में कथित तौर पर मदद करने वाले आरोपी के दोस्त की तलाश की जा रही है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। आरोप है कि मुख्य आरोपी ने किशोरी से बातचीत के दौरान अपनी असली पहचान नहीं बताई और दूसरी पहचान के सहारे उससे नजदीकियां बढ़ाईं। बाद में किशोरी को विश्वास में लेकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। घटना की जानकारी परिवार को मिलने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई शुरू की। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए मामले में बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी जांच की जा रही है। पुलिस पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच के दौरान मुख्य आरोपी के एक दोस्त की भूमिका भी सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि उसने घटना के बाद महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने या छिपाने में सहयोग किया। पुलिस अब उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। आरोपी के दोस्त से पूछताछ के बाद मामले से जुड़े कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने किशोरी से संपर्क कैसे किया था और दोनों के बीच बातचीत कब से चल रही थी। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल बातचीत से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। इससे आरोपी की पहचान छिपाने और किशोरी को कथित तौर पर झांसे में लेने से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है। मामले में डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले और बाद में आरोपी तथा उसके दोस्त के बीच क्या बातचीत हुई थी। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि साक्ष्यों को मिटाने के लिए किस तरह की कोशिश की गई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।
पीड़िता की सुरक्षा और पहचान की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए पुलिस मामले से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को सार्वजनिक करने से बच रही है। नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामलों में पीड़ित की पहचान उजागर करना कानूनन प्रतिबंधित है। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता मुख्य मामले की जांच के साथ साक्ष्य मिटाने में कथित रूप से शामिल युवक को तलाशना है। उसके पकड़े जाने और पूछताछ के बाद घटना के संबंध में और जानकारी सामने आ सकती है। पुलिस उपलब्ध तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।