रुद्रपुर। देशभर में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। साइबर अपराधी अब बुजुर्गों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, क्राइम ब्रांच या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन करते हैं। इसके बाद किसी गंभीर अपराध में फंसाने और गिरफ्तारी का भय दिखाकर पीड़ित को घंटों वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे मामलों को देखते हुए एसटीएफ और साइबर थाना पुलिस लोगों को अपने घर के बुजुर्गों के व्हाट्सएप में 'स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग' सक्रिय करने के लिए जागरूक कर रही है।

बुजुर्गों को बनाया जा रहा आसान निशाना

साइबर ठगी के मामलों में बुजुर्गों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं चिंता का विषय बन रही हैं।

ठग उनकी उम्र, तकनीकी जानकारी की कमी और कानूनी कार्रवाई के डर का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

अपराधी फोन पर खुद को सरकारी अधिकारी बताकर बातचीत शुरू करते हैं। इसके बाद पीड़ित को किसी आपराधिक मामले से जोड़ने का दावा करते हैं।

इस तरह अचानक गंभीर आरोप लगाए जाने से बुजुर्ग घबरा सकते हैं।

ठग इसी डर का इस्तेमाल कर उनसे बैंक खातों और जमा राशि से जुड़ी जानकारी हासिल करने या पैसे ट्रांसफर करवाने का प्रयास करते हैं।

पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर करते हैं कॉल

साइबर अपराधियों का एक प्रमुख तरीका सरकारी जांच एजेंसियों के नाम का दुरुपयोग करना है।

ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, क्राइम ब्रांच या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हैं।

वे पीड़ित को विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि उसके खिलाफ कोई गंभीर मामला दर्ज है।

इसके बाद गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया जाता है।

कई बार अपराधी वीडियो कॉल के माध्यम से अपनी पहचान को विश्वसनीय बनाने की कोशिश करते हैं।

हालांकि, फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति का अधिकारी होने का दावा उसकी वास्तविक पहचान का प्रमाण नहीं होता।

क्या है डिजिटल अरेस्ट का जाल?

डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला धोखाधड़ी का तरीका है।

इसमें अपराधी पीड़ित को बताते हैं कि वह किसी मामले में जांच के दायरे में है और उसे लगातार वीडियो कॉल पर रहना होगा।

ठग पीड़ित को किसी से बात नहीं करने या कॉल बंद नहीं करने के लिए भी डरा सकते हैं।

इस दौरान गिरफ्तारी से बचाने, जांच में सहयोग करने या मामले को समाप्त करने के नाम पर पैसे मांगे जा सकते हैं।

भारत में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई वैध गिरफ्तारी प्रक्रिया नहीं है। पुलिस या अन्य जांच एजेंसियां वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को इस तरह हिरासत में नहीं रख सकतीं।

जीवनभर की जमा-पूंजी पर ठगों की नजर

साइबर अपराधियों का मुख्य उद्देश्य पीड़ित से पैसे हासिल करना होता है।

बुजुर्गों के पास सेवानिवृत्ति के बाद की बचत, पेंशन या अन्य जमा राशि हो सकती है।

अपराधी इसी धनराशि को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं।

डर और मानसिक दबाव के कारण पीड़ित कभी-कभी बिना सत्यापन किए पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।

इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ऐसे मामलों में परिवार के सदस्यों की जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

व्हाट्सएप की सुरक्षा सेटिंग सक्रिय करने की सलाह

डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के लिए एसटीएफ और साइबर थाना पुलिस बुजुर्गों के मोबाइल में व्हाट्सएप की 'स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग' सक्रिय करने के प्रति जागरूक कर रही है।

यह सेटिंग अतिरिक्त सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई है।

इसके माध्यम से अनजान लोगों से आने वाली कुछ प्रकार की सामग्री और संपर्कों से जुड़े जोखिम कम किए जा सकते हैं।

हालांकि, किसी भी सुरक्षा सेटिंग को सक्रिय करने से सभी साइबर अपराध पूरी तरह नहीं रुकते।

डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी से बचने के लिए संदिग्ध कॉल की पहचान करना और किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे नहीं भेजना उतना ही जरूरी है।

व्हाट्सएप में ऐसे जांचें सुरक्षा सेटिंग

व्हाट्सएप की स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग सक्रिय करने के सामान्य चरण

1. मोबाइल में व्हाट्सएप खोलें और सेटिंग्स में जाएं।

2. प्राइवेसी विकल्प खोलें।

3. यदि उपलब्ध हो, तो एडवांस्ड में जाकर स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स चुनें।

4. स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों के अनुसार सुरक्षा विकल्प सक्रिय करें।

यह सुविधा ऐप के संस्करण और उपलब्धता के अनुसार अलग दिखाई दे सकती है। जरूरत पड़ने पर व्हाट्सएप अपडेट करें।

अनजान वीडियो कॉल से रहें सावधान

साइबर ठग अक्सर वीडियो कॉल का इस्तेमाल कर पीड़ित पर दबाव बनाते हैं।

यदि कोई व्यक्ति खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देता है, तो उसकी बातों पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए।

किसी भी सरकारी अधिकारी की पहचान आधिकारिक माध्यम से सत्यापित की जा सकती है।

संदिग्ध कॉल आने पर परिवार के विश्वसनीय सदस्य को जानकारी देना उचित है।

किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते की जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी या अन्य गोपनीय विवरण साझा नहीं करने चाहिए।

परिवार के सदस्य निभाएं महत्वपूर्ण भूमिका

बुजुर्गों को साइबर ठगी से बचाने में परिवार के सदस्य बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

उन्हें नियमित रूप से नए साइबर अपराधों के तरीकों के बारे में जानकारी देनी चाहिए।

मोबाइल में गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी सेटिंग्स की जांच भी की जा सकती है।

बुजुर्गों को समझाना जरूरी है कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर घबराने के बजाय परिवार से बातचीत करें।

यदि कोई व्यक्ति तत्काल पैसे भेजने का दबाव बनाए, तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें।

इस तरह छोटी-छोटी सावधानियां बड़े आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद कर सकती हैं।

साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत

यदि कोई व्यक्ति डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धमकाता है या पैसे मांगता है, तो तुरंत कॉल समाप्त कर देनी चाहिए।

यदि ठगी के कारण पैसे ट्रांसफर हो गए हैं, तो संबंधित बैंक को तत्काल सूचना देना जरूरी है।

भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 उपलब्ध है।

इसके अलावा आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

जल्दी शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को लेनदेन की जानकारी प्राप्त करने और उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

डर और जल्दबाजी से बचना जरूरी

साइबर अपराधी अक्सर पीड़ित को सोचने का समय नहीं देते।

वे गिरफ्तारी, मुकदमे या अन्य कानूनी परिणामों का डर दिखाकर तत्काल निर्णय लेने का दबाव बनाते हैं।

ऐसी स्थिति में शांत रहना और दावे की स्वतंत्र पुष्टि करना जरूरी है।

किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पैसे मांगता है, तो इसे गंभीर चेतावनी संकेत मानना चाहिए।

जागरूकता ही सबसे प्रभावी बचाव

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्गों से ठगी की कोशिशों को देखते हुए एसटीएफ और साइबर थाना पुलिस जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रही है।

व्हाट्सएप की स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग जैसे सुरक्षा उपाय उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन सतर्कता और जानकारी सबसे महत्वपूर्ण हैं।

बुजुर्गों को यह समझाना जरूरी है कि कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट करके पैसे नहीं मांग सकती। संदिग्ध कॉल मिलने पर तुरंत परिवार को बताएं और जरूरत पड़ने पर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

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