उत्तराखंड : एक उपमंडल के सबसे बड़े गोविंद सिंह माहरा नागरिक चिकित्सालय में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक बुजुर्ग की अस्पताल के गेट पर ही मौत हो गई। परिजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि समय पर स्ट्रेचर और प्राथमिक उपचार नहीं मिलने के कारण घायल की जान चली गई।
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर नाराजगी जताई।
सड़क हादसे में घायल हुए थे बुजुर्ग
जानकारी के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले एक बुजुर्ग सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद स्थानीय लोग उन्हें तुरंत उपचार के लिए गोविंद सिंह माहरा नागरिक चिकित्सालय लेकर पहुंचे।
घायल की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के समय तक घायल की सांसें चल रही थीं और उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत थी।
स्ट्रेचर के लिए करनी पड़ी मशक्कत
ग्रामीणों के अनुसार, घायल को अस्पताल के गेट तक पहुंचाने के बाद उन्होंने इमरजेंसी में तैनात चिकित्साधिकारी से मदद मांगी।
आरोप है कि चिकित्साधिकारी ने घायल को आपातकालीन वार्ड में ले जाने की सलाह दी, लेकिन इसके लिए न तो तुरंत स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया और न ही कोई स्वास्थ्य कर्मी मदद के लिए पहुंचा।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब आधे घंटे तक स्ट्रेचर की तलाश और व्यवस्था करने में समय निकल गया।
समय पर इलाज नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इलाज में देरी के कारण घायल बुजुर्ग की हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उन्होंने अस्पताल के गेट पर ही दम तोड़ दिया।
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में गुस्सा फैल गया। उनका कहना था कि अगर समय पर प्राथमिक उपचार मिल जाता तो शायद बुजुर्ग की जान बचाई जा सकती थी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद पहाड़ी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि बड़े अस्पतालों में भी आपात स्थिति के लिए जरूरी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों के लिए स्ट्रेचर जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं होना बेहद चिंताजनक है।
ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
अस्पताल परिसर में ग्रामीणों का प्रदर्शन
बुजुर्ग की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में विरोध जताया।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं।
ग्रामीणों ने मांग की कि घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से जवाब की मांग
इस घटना ने अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में स्वास्थ्य कर्मी और जरूरी उपकरण होने चाहिए, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
जांच के बाद साफ होगी स्थिति
फिलहाल मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घायल बुजुर्ग की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या वास्तव में इलाज में लापरवाही बरती गई थी।
इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि किसी मरीज की जान केवल व्यवस्था की कमी के कारण न जाए।