भ्रष्टाचार पर चर्चा की मांग को लेकर कांग्रेस का हंगामा, बजट समेत अहम प्रस्ताव पारित
उत्तराखंड विधानसभा में हंगामे
गैरसैंण: उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र बुधवार, 28 अक्टूबर को कांग्रेस विधायकों के भारी हंगामे के बीच समाप्त हो गया। भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में विपक्ष की नारेबाजी और विरोध के दौरान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित कराया। सदन में विनियोग विधेयक समेत कुल 10 विधेयकों को मंजूरी दी गई। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। सत्र के दूसरे और अंतिम दिन कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के आरोपों तथा अन्य जनहित के मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग उठाई। विपक्षी सदस्य अपनी मांग के समर्थन में सदन के वेल में पहुंच गए। इस दौरान काले झंडे लहराए गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई। कार्यवाही बार-बार बाधित होने के बावजूद सरकार ने निर्धारित वित्तीय और विधायी कामकाज पूरा किया।
सदन शुरू होने से पहले कांग्रेस का धरना
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक भवन के बाहर धरने पर बैठे। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं ने कानून-व्यवस्था, पलायन और अंकिता भंडारी प्रकरण समेत विभिन्न विषयों पर सरकार से जवाब मांगा। यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि प्रदेश के गंभीर मुद्दों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने भी सरकारी खर्च और संपत्तियों से संबंधित मामलों पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना था कि विधानसभा में इन विषयों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं; इन्हें सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
नियम 310 के तहत चर्चा पर अड़ा विपक्ष
सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने नियम 310 के तहत कार्यस्थगन कर चर्चा कराने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष के साथ अन्य कांग्रेस सदस्यों ने भी इस मांग का समर्थन किया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने और कार्यवाही चलने देने को कहा, लेकिन विरोध जारी रहा। अध्यक्ष नियम 58 के तहत चर्चा कराने को तैयार थीं, जबकि कांग्रेस नियम 310 के अंतर्गत चर्चा की मांग पर अड़ी रही। इसी मुद्दे पर गतिरोध बढ़ता गया। हंगामे के कारण पहले कार्यवाही सुबह 11:20 बजे तक, फिर दोपहर 12 बजे तक और उसके बाद सवा 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गए। नारेबाजी और काले झंडे लहराने के साथ कागज फेंकने की घटनाएं भी सामने आईं। लगातार व्यवधान के कारण सदन का सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ और सरकार तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा।
रेखा आर्य से जुड़े आरोपों पर तीखी बहस
सत्र में मंत्री रेखा आर्य और उनके पति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोप प्रमुख विवाद का विषय बने। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने संबंधित मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। विपक्षी सदस्यों ने आरोपों पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा और नारेबाजी की। रेखा आर्य ने आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए विपक्ष को घेरा। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के विधायकों ने चकराता में एक परिवार को कथित धमकी दिए जाने का मुद्दा उठाकर जांच की मांग की। इस तरह दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सवाल उठाते रहे।
अनुपूरक बजट और विधेयकों को मिली मंजूरी
शोर-शराबे के बीच सरकार ने अनुपूरक बजट और विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कराया। पारित प्रस्तावों में अनुपूरक व्यय से संबंधित विनियोग विधेयक के अलावा सिंचाई एवं जल निकासी, राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन संशोधन और निवेश तथा आधारिक संरचना से जुड़े विधेयक शामिल हैं। इसके साथ जन विश्वास उपबंधों का संशोधन द्वितीय विधेयक, अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन, सिविल विधि संशोधन, अग्निशमन एवं आपात सेवा, माल एवं सेवा कर संशोधन तथा निजी विश्वविद्यालय द्वितीय संशोधन विधेयक भी पारित हुए। इस प्रकार वित्तीय स्वीकृति के साथ विभिन्न प्रशासनिक और नियामकीय विषयों से जुड़ा विधायी कामकाज पूरा किया गया।
सरकार ने विपक्ष पर चर्चा बाधित करने का लगाया आरोप
सत्र के बाद संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि व्यवधान के बावजूद आवश्यक वित्तीय और विधायी कार्य पूरे किए गए। उन्होंने कांग्रेस पर महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा बाधित करने का आरोप लगाया। सरकार का पक्ष था कि विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर उपलब्ध था। कांग्रेस ने कहा कि छोटे सत्र में जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी। विधानसभा के आधिकारिक सत्र कैलेंडर में यह बैठक 27 और 28 अक्टूबर के लिए निर्धारित थी। अंततः राजनीतिक गतिरोध और हंगामे के बीच बजट तथा विधेयकों के पारित होने के बाद सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।