‘शांतिपूर्वक दर्शन के लिए आए हैं’: Ajay Singh Nihang ने सुरक्षा पर उठाए सवाल

Update: 2026-06-25 15:45 GMT

देहरादून/मोहाली: उत्तराखंड के कर्णप्रयाग और नागरासू में चल रहे भूमि व धार्मिक स्थल संबंधी विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर पंजाब के मोहाली से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की ओर कूच कर रहे निहंग संगठनों (जत्थेबंदियों) के एक बड़े जत्थे को हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर रोक दिया गया है। उत्तराखंड पुलिस ने कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के मद्देनजर सीमा पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया है, जिसके बाद वहां तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।मोहाली से शुरू हुआ था मार्चजानकारी के अनुसार, यह जत्था आज सुबह मोहाली स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा सिंह शहीदां से अरदास करने के बाद उत्तराखंड के लिए रवाना हुआ था।

इस जत्थे में बड़ी संख्या में निहंग सिख पारंपरिक पोशाक, घोड़ों और अपने धार्मिक प्रतीकों के साथ शामिल थे। इनका उद्देश्य देहरादून पहुंचकर राज्य सरकार और उच्च अधिकारियों के सामने कर्णप्रयाग व नागरासू विवाद को लेकर अपना विरोध दर्ज कराना था। जैसे ही इस मार्च की भनक उत्तराखंड प्रशासन को लगी, राज्य के सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया।बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात, रोके गए निहंगजैसे ही निहंगों का यह काफिला हिमाचल प्रदेश की सीमा को पार कर उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करने लगा, पहले से ही मुस्तैद उत्तराखंड पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने उन्हें रोक दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने नहीं दी जाएगी। पुलिस ने सीमा पर बैरिकेडिंग कर रखी थी और जत्थे को आगे बढ़ने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद निहंग सिखों और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।एक दिन पहले बनी सहमति पर फिरा पानी!हैरानी की बात यह है कि इस मार्च से ठीक एक दिन पहले, निहंग संगठनों के वरिष्ठ जत्थेदारों और उत्तराखंड शासन के उच्च पदस्थ अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। उस बैठक में शामिल जत्थेदारों ने प्रशासन के रवैये और दिए गए आश्वासनों पर पूरी तरह संतोष व्यक्त किया था।

ऐसा माना जा रहा था कि आपसी बातचीत से मामले का हल निकल आएगा और यह विवाद यहीं थम जाएगा।इसके बावजूद, निहंगों के भीतर ही एक धड़ा इस फैसले से पूरी तरह असहमत दिखा। इस धड़े का मानना था कि जब तक जमीन पर उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसी जिद के कारण इस धड़े ने आज उत्तराखंड की ओर मार्च करने का फैसला किया, जिससे प्रशासन की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गईं।"सरकार ने हमारी सुरक्षा में लगाई सेंध" – अजय सिंह निहंगबॉर्डर पर रोके जाने के बाद निहंग नेता अजय सिंह निहंग ने मीडिया और प्रशासन के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने सरकार और पुलिसिया कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा:"हम यहाँ केवल वाहेगुरु के दर्शन और अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने के लिए पहुंचे हैं। हम आगे भी पूरी तरह शांति और मर्यादा के साथ बढ़ना चाहते हैं। सिख दर्शन और हमारी परंपरा हमें यही सिखाती है कि हम किसी को परेशान न करें। पूरी दुनिया जानती है कि सिख हमेशा सबकी रक्षा के लिए आगे खड़े रहते हैं। लेकिन आज बड़े दुख की बात है कि खुद सरकार द्वारा हमारी सुरक्षा और हमारे अधिकारों पर चोट की जा रही है, इसमें एक बड़ा डेंट लगाया गया है।"क्या है कर्णप्रयाग और नागरासू का मुख्य विवाद?उत्तराखंड के चमोली जिले के अंतर्गत आने वाले कर्णप्रयाग और नागरासू क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से एक स्थान को लेकर स्थानीय समुदायों और सिख संगठनों के बीच विवाद चल रहा है। सिख समुदाय का दावा है कि इस स्थान का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है, जबकि स्थानीय स्तर पर इस भूमि के उपयोग और निर्माण को लेकर आपत्तियां जताई जा रही हैं। मामला संवेदनशील होने के कारण जिला प्रशासन लगातार दोनों पक्षों से वार्ता कर शांति व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास कर रहा है, लेकिन रह-रहकर यह मुद्दा गरमा जाता है।प्रशासन की पैनी नजर, शांति की अपीलउत्तराखंड पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के सभी संवेदनशील प्रवेश द्वारों और सीमाओं पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। खुफिया तंत्र को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से कोई भ्रामक सूचना न फैले। अधिकारियों ने साफ किया है कि बातचीत के रास्ते हमेशा खुले हैं, लेकिन किसी को भी कानून हाथ में लेने या राज्य की शांति भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। फिलहाल बॉर्डर पर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है और बातचीत के जरिए निहंगों को वापस भेजने या समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

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