कार लोन के नाम पर कारोबारी से धोखाधड़ी, खाते में रकम आए बिना कटती रही किस्त
हल्द्वानी। कार खरीदने के लिए कर्ज दिलाने के नाम पर एक कारोबारी से कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कर्ज की रकम कारोबारी के खाते में पहुंची ही नहीं, लेकिन इसके बावजूद उसके बैंक खाते से लगातार किस्त और जुर्माने की रकम काटी जाती रही। इतना ही नहीं, कर्ज खत्म होने का भरोसा दिलाने के लिए आरोपितों की ओर से 9.50 लाख रुपये की कथित फर्जी बैंक हस्तांतरण रसीद भी भेजी गई। मामले में न्यायालय के आदेश के बाद बनभूलपुरा पुलिस ने वित्तीय कंपनी के अधिकृत अधिकारी समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बताया गया है कि पीड़ित कारोबारी ने कार खरीदने के लिए वित्तीय कंपनी के माध्यम से कर्ज लेने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी दौरान आरोपितों के संपर्क में आने के बाद उसे कर्ज दिलाने का भरोसा दिया गया। कारोबारी के मुताबिक, उसे बताया गया कि कार की खरीद के लिए आवश्यक ऋण राशि उपलब्ध करा दी जाएगी और पूरी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाएगी।
शिकायत के अनुसार, कर्ज से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद कारोबारी को उम्मीद थी कि ऋण की स्वीकृत रकम उसके बैंक खाते में आएगी या कार की खरीद के लिए संबंधित पक्ष को भुगतान किया जाएगा। हालांकि, आरोप है कि कर्ज की रकम कारोबारी के खाते में आई ही नहीं। इसके बावजूद उसके1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सज़ा काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 साल की उम्र में निधन हो गया।
कुमार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
800 शब्दों में समाचार बनाये बैंक खाते से ऋण की किस्त काटी जाने लगी।
पीड़ित का आरोप है कि किस्त के साथ-साथ खाते से जुर्माने की रकम भी काटी जाती रही। जब कारोबारी ने इस संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की तो उसे कर्ज से जुड़ी स्थिति स्पष्ट करने के बजाय अलग-अलग तरह की जानकारी दी गई। इससे उसे संदेह हुआ कि उसके साथ वित्तीय धोखाधड़ी की जा रही है।
मामले में आरोपितों ने कथित तौर पर कारोबारी को यह भरोसा दिलाने का प्रयास किया कि उसका कर्ज समाप्त कर दिया गया है। इसी क्रम में उसे 9.50 लाख रुपये के बैंक हस्तांतरण की एक रसीद भेजी गई। कारोबारी का आरोप है कि यह रसीद फर्जी थी और वास्तविक रूप से इतनी रकम उसके खाते में हस्तांतरित नहीं हुई थी।
जब कारोबारी ने बैंक खाते और ऋण खाते से संबंधित विवरण की जांच की तो कथित लेन-देन की वास्तविकता पर सवाल खड़े हुए। इसके बाद उसने संबंधित लोगों से संपर्क कर स्पष्टीकरण मांगा। आरोप है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उसने पुलिस से शिकायत की, लेकिन मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर उसने न्यायालय का रुख किया।
न्यायालय के आदेश के बाद बनभूलपुरा थाना पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने वित्तीय कंपनी के अधिकृत अधिकारी समेत तीन लोगों को आरोपी बनाया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कथित धोखाधड़ी से जुड़े दस्तावेजों तथा बैंक लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच में बैंक खातों की जानकारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस यह पता लगाएगी कि कथित 9.50 लाख रुपये के हस्तांतरण की रसीद किसने तैयार की, उसे कारोबारी तक किस माध्यम से पहुंचाया गया और वास्तव में किसी खाते से कोई रकम स्थानांतरित हुई थी या नहीं। इसके अलावा, कारोबारी के खाते से काटी गई किस्त और जुर्माने की रकम का रिकॉर्ड भी जांचा जाएगा।
मामले में वित्तीय कंपनी के अधिकृत अधिकारी का नाम सामने आने के कारण कंपनी से जुड़े रिकॉर्ड भी पुलिस की जांच के दायरे में आ सकते हैं। पुलिस ऋण आवेदन, स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, किस्तों की जानकारी और कारोबारी के साथ हुए संचार की भी पड़ताल कर सकती है।
पीड़ित कारोबारी के अनुसार, उसे कर्ज मिलने का भरोसा देकर पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, लेकिन बाद में ऐसी स्थिति पैदा हुई जिसमें कर्ज की रकम प्राप्त हुए बिना ही उसके खाते से भुगतान होने लगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला वित्तीय लेन-देन के नाम पर दस्तावेजों और बैंकिंग प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि इस मामले में केवल तीन लोग ही शामिल थे या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है। यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस आरोपितों से पूछताछ के साथ-साथ बैंकिंग दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बना सकती है।
कारोबारी के खाते से किस्त और जुर्माने की रकम कटने के मामले की भी विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाएगी कि किस आधार पर रकम काटी गई और संबंधित ऋण खाते में किस प्रकार की प्रविष्टियां दर्ज थीं। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि ऋण वास्तव में किसके नाम और किस उद्देश्य से स्वीकृत किया गया था।
मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पीड़ित को अब जांच से कार्रवाई की उम्मीद है। कारोबारी ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई और कथित रूप से काटी गई रकम के संबंध में उचित समाधान की मांग की है।
फिलहाल बनभूलपुरा पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 9.50 लाख रुपये की कथित फर्जी बैंक हस्तांतरण रसीद, खाते से काटी गई किस्त और जुर्माने की रकम तथा कर्ज से जुड़े दस्तावेज जांच के प्रमुख बिंदु हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में धोखाधड़ी किस स्तर पर और किस तरीके से की गई।