बीजेपी सांसद अनिल बलूनी ने रामलीला मैदान में मनाया पारंपरिक उत्सव

Update: 2025-11-01 17:03 GMT
उत्तराखंड Uttarakhand: देवभूमि उत्तराखंड में पारंपरिक लोकपर्व इगास (बग्वाल) का उत्सव पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने पौड़ी के रामलीला मैदान में स्थानीय लोगों के साथ पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर पर्व का उत्सव मनाया। पर्व के दौरान लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और पहाड़ी व्यंजनों की खुशबू से पूरा मैदान उत्सवमय हो उठा।इगास पर्व, जिसे दीपावली के 11 दिन बाद मनाया जाता है, गढ़वाल क्षेत्र की समृद्ध लोकसंस्कृति का प्रतीक है। यह पर्व गांव लौटने वाले योद्धाओं और पशुधन के सम्मान में मनाया जाता है। इस अवसर पर अनिल बलूनी ने कहा कि “इगास केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और अपनी जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक है। हमें इस धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना होगा।”
रामलीला मैदान में उत्सव का दृश्य
रामलीला मैदान में आयोजित समारोह में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग, महिलाएं और बच्चे पारंपरिक परिधानों में पहुंचे। लोक कलाकारों ने ढोल-दमाऊं की थाप पर झोड़ा और चांचरी जैसे पारंपरिक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। सांसद बलूनी ने भी स्थानीय कलाकारों के साथ नृत्य में भाग लिया और लोगों को बधाई दी। बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति ही राज्य की पहचान है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी लोकभाषा, रीति-रिवाज और पारंपरिक त्योहारों को जीवित रखें। “हमारी संस्कृति में अपार शक्ति है, जो हमें प्रकृति और समाज से जोड़ती है,” उन्होंने कहा।
इगास पर्व का ऐतिहासिक महत्व
इगास पर्व का संबंध दीपावली से है। कहा जाता है कि जब भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे, तब गढ़वाल क्षेत्र के लोग पशुपालन और कृषि में व्यस्त होने के कारण उन्हें यह समाचार देर से मिला। जब यह खबर यहां पहुंची, तो स्थानीय लोगों ने दीप जलाकर और नृत्य-गीत के साथ इसे ‘इगास बग्वाल’ के रूप में मनाया। तभी से यह पर्व हर वर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है।
स्थानीय व्यंजन और परंपरा
इस अवसर पर भट्ट की चुड़कनी, झंगोरे की खीर, आलू के गुटके और मंडवे की रोटी जैसे पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत गाकर भगवान और पूर्वजों का आशीर्वाद मांगा। पर्व में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे।
समापन में सांसद बलूनी ने कहा, “उत्तराखंड की असली ताकत उसकी संस्कृति और लोकजीवन में है। जब तक हम अपनी परंपराओं को सहेजकर नहीं रखेंगे, तब तक विकास अधूरा रहेगा।”
इगास पर्व के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन ने विशेष प्रबंध किए थे। कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ और रात देर तक पारंपरिक गीतों की गूंज गढ़वाल की पहाड़ियों में सुनाई देती रही।
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