बद्रीनाथ धाम चढ़ावा चोरी केस में गिरफ्तारी आरोपित प्रमोद नौटियाल के करीबी अधिकारी पर कार्रवाई
बद्रीनाथ धाम चढ़ावा चोरी मामले में SIT का एक्शन प्रमोद नौटियाल का करीबी अधिकारी गिरफ्तार
देहरादून/बद्रीनाथ: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी SIT ने अब एक और महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आए CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर चौहान की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी।
यह गिरफ्तारी उस मामले में हुई है जिसमें पहले BKTC के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। नौटियाल पर बद्रीनाथ मंदिर के चढ़ावे की गणना से जुड़े कक्ष में कथित तौर पर नकदी और अन्य चढ़ावे से संबंधित सामान में हेराफेरी करने के आरोप हैं। SIT अब मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
ताजा कार्रवाई से यह संकेत मिल रहा है कि जांच एजेंसी केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि चढ़ावे की गणना, रिकॉर्डिंग, निगरानी और जमा प्रक्रिया से जुड़े पूरे तंत्र की पड़ताल कर रही है।
बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड सरकार और मंदिर प्रशासन पर भी सवाल उठे थे। इसके बाद मामले की जांच के लिए SIT को जिम्मेदारी दी गई।
जांच के दौरान टीम ने मंदिर परिसर और चढ़ावा गणना से जुड़े स्थानों पर उपलब्ध CCTV फुटेज को खंगाला। इसके अलावा दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की गई।
ताजा कार्रवाई में SIT ने पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को गिरफ्तार किया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने उनसे कई घंटे तक पूछताछ करने के बाद गिरफ्तारी की।
कौन हैं राजेंद्र सिंह चौहान?
राजेंद्र सिंह चौहान बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में मंदिर अधिकारी के रूप में काम कर चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वह इसी वर्ष 30 जून को समिति की सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे।
जांच एजेंसी को संदेह है कि सेवा में रहते हुए चढ़ावे की गणना से जुड़े कुछ मामलों में उनकी भूमिका रही हो सकती है।
SIT के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए CCTV फुटेज में कुछ तारीखों पर उन्हें थाली भेंट गणना कक्ष में नकदी निकालते हुए देखा गया। इसी आधार पर उनसे पूछताछ की गई और इसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई।
हालांकि, किसी भी आरोपी की भूमिका को अंतिम रूप से दोष सिद्ध मानना उचित नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
CCTV फुटेज बना जांच का अहम आधार
इस पूरे मामले में CCTV फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
मंदिर में चढ़ावे की गणना से जुड़े कक्षों में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग को जांच टीम ने खंगाला। SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन तारीखों में कौन-कौन से कर्मचारी या अधिकारी गणना कक्ष में मौजूद थे और उस दौरान नकदी तथा अन्य चढ़ावे के साथ क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
रिपोर्ट के मुताबिक राजेंद्र चौहान से संबंधित कुछ गतिविधियां CCTV फुटेज में सामने आईं, जिसके बाद उनसे पूछताछ की गई।
CCTV के अलावा दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
22, 25 और 29 जून की फुटेज का जिक्र
SIT की जांच में कुछ विशेष तारीखों की CCTV रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण बताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक 22 जून, 25 जून और 29 जून की फुटेज में राजेंद्र चौहान को थाली भेंट गणना कक्ष में कथित रूप से नकदी निकालते हुए देखा गया।
इन्हीं फुटेज के आधार पर SIT ने उनसे पूछताछ की। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
अब जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि इन घटनाओं के पीछे व्यक्तिगत स्तर पर कोई कथित हेराफेरी थी या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका रही।
प्रमोद नौटियाल पहले ही गिरफ्तार
बद्रीनाथ चढ़ावा मामले में यह पहली गिरफ्तारी नहीं है।
इससे पहले SIT ने BKTC के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार किया था। नौटियाल इस मामले के प्रमुख आरोपितों में शामिल हैं और उनकी ड्यूटी भी चढ़ावे की गणना से जुड़े कक्ष में लगाई गई थी।
पुलिस ने जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ की थी।
अब राजेंद्र चौहान की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी के सामने यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि चढ़ावे की कथित हेराफेरी में कितने लोग शामिल थे और पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितता हुई।
आखिर क्या है पूरा मामला?
बद्रीनाथ मंदिर में देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्त मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ नकद राशि, आभूषण, सिक्के, धार्मिक वस्तुएं और अन्य सामग्री चढ़ाते हैं।
इन चढ़ावों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत गणना और रिकॉर्डिंग की जाती है।
इसी प्रक्रिया से जुड़े कुछ कर्मचारियों पर कथित रूप से चढ़ावे में हेराफेरी के आरोप सामने आए।
मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद जांच को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया।
FIR में क्या हुआ?
मामले को लेकर बद्रीनाथ थाने में FIR भी दर्ज की गई थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार प्रमोद नौटियाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सरकार और मंदिर समिति की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।
इसके बाद SIT ने जांच संभाली और मामले से जुड़े दस्तावेज, CCTV फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों की जांच शुरू की।
चढ़ावे की गणना कक्ष पर क्यों है नजर?
मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त चढ़ावे की गणना एक संवेदनशील प्रक्रिया है।
यहां बड़ी मात्रा में नकदी और दूसरी धार्मिक सामग्री जमा हो सकती है। ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कड़ी निगरानी बेहद जरूरी होती है।
जांच एजेंसी का ध्यान इसी प्रक्रिया पर है कि चढ़ावा प्राप्त होने से लेकर उसकी गणना और रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने तक कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी जिम्मेदार थे।
यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी पहचान करना SIT की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
क्या केवल नकदी में हुई हेराफेरी?
जांच केवल नकदी तक सीमित नहीं बताई जा रही है।
मंदिर में नकदी के अलावा श्रद्धालु सोने-चांदी के सिक्के, धार्मिक वस्तुएं और अन्य सामग्री भी चढ़ाते हैं।
कुछ रिपोर्टों में शालिग्राम और चढ़ावे के लिफाफों सहित अन्य सामग्री का भी जिक्र हुआ है। CCTV फुटेज की जांच के दौरान इन वस्तुओं से जुड़े संदिग्ध व्यवहार को भी देखा गया।
हालांकि इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में मामले की सुनवाई के बाद ही होगी।
SIT किन पहलुओं की जांच कर रही है?
SIT के सामने कई अहम सवाल हैं।
चढ़ावे की गणना की प्रक्रिया क्या थी?
गणना कक्ष में किन लोगों की ड्यूटी लगती थी?
किस कर्मचारी के पास कितनी देर तक चढ़ावे की पहुंच रहती थी?
CCTV फुटेज में क्या-क्या गतिविधियां सामने आईं?
रिकॉर्ड और वास्तविक चढ़ावे में कोई अंतर था या नहीं?
क्या किसी एक व्यक्ति ने कथित तौर पर हेराफेरी की या कई लोग इसमें शामिल थे?
चढ़ावे की सुरक्षा और निगरानी के लिए निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं?
इन सवालों के जवाब जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
प्रमोद नौटियाल की भूमिका की जांच
प्रमोद नौटियाल इस मामले में पहले से जांच के केंद्र में हैं।
रिपोर्टों के अनुसार वह चढ़ावा गणना कक्ष से जुड़े काम में तैनात थे। इसी दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर उन पर कार्रवाई हुई।
SIT अब यह भी जांच सकती है कि उनकी भूमिका किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी से जुड़ी थी या नहीं।
राजेंद्र चौहान की गिरफ्तारी इसी व्यापक जांच का हिस्सा मानी जा रही है।
क्या दोनों के बीच संबंध की जांच होगी?
राजेंद्र चौहान और प्रमोद नौटियाल दोनों का मंदिर समिति की व्यवस्था से संबंध रहा है।
ऐसे में SIT यह भी देख सकती है कि क्या दोनों के बीच किसी प्रकार का प्रशासनिक या कार्य-संबंधी संपर्क था और क्या चढ़ावे की गणना से जुड़ी गतिविधियों में दोनों की भूमिकाएं एक-दूसरे से जुड़ी थीं।
हालांकि किसी आपराधिक साजिश या मिलीभगत का निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले निकालना उचित नहीं होगा।
सेवानिवृत्ति के बाद गिरफ्तारी
राजेंद्र सिंह चौहान इसी वर्ष 30 जून को BKTC की सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे।
इसके कुछ ही समय बाद जांच में उनका नाम सामने आया और SIT ने पूछताछ की।
रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को बद्रीनाथ में उनसे करीब चार घंटे तक पूछताछ की गई और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच एजेंसी मामले में वर्तमान कर्मचारियों के साथ-साथ उन लोगों की भूमिका भी देख रही है जो संबंधित अवधि में मंदिर समिति की व्यवस्था का हिस्सा थे।
मंदिर प्रशासन पर भी बढ़ा दबाव
बद्रीनाथ चढ़ावा मामले के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठे।
श्रद्धालु मंदिर में आस्था के साथ चढ़ावा देते हैं। ऐसे में चढ़ावे की सुरक्षा और पारदर्शी प्रबंधन मंदिर प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
कथित अनियमितताओं की खबर सामने आने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
CCTV व्यवस्था की भूमिका
मंदिर परिसर में CCTV कैमरों की मौजूदगी ने जांच एजेंसी को महत्वपूर्ण सुराग उपलब्ध कराने में मदद की।
यदि कैमरों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होती तो किसी कर्मचारी की गतिविधियों की पुष्टि करना अधिक कठिन हो सकता था।
अब SIT इन रिकॉर्डिंग को अन्य दस्तावेजों और बयान के साथ मिलाकर देख रही है।
रिकॉर्ड और फुटेज का मिलान
जांच में केवल CCTV फुटेज देखना पर्याप्त नहीं होगा।
किस तारीख को कितनी राशि या सामग्री गणना के लिए आई, किस कर्मचारी ने उसे संभाला, गणना के बाद कितना रिकॉर्ड किया गया और कितना जमा हुआ—इन सभी रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है।
यदि रिकॉर्ड और CCTV गतिविधियों में अंतर मिलता है तो जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
चढ़ावे की पारदर्शिता क्यों जरूरी?
देश के बड़े धार्मिक स्थलों पर रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिरों में धन और अन्य सामग्री दान करते हैं।
इस धन का प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ होना जरूरी है, क्योंकि यह किसी व्यक्तिगत व्यक्ति की संपत्ति नहीं बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा योगदान होता है।
बद्रीनाथ धाम की विशेषता
बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चार धामों में प्रमुख स्थान रखता है।
देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां भगवान बद्रीनारायण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
धाम की धार्मिक प्रतिष्ठा को देखते हुए यहां प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता का महत्व और बढ़ जाता है।
श्रद्धालुओं की आस्था का सवाल
मंदिर में चढ़ावा केवल पैसा नहीं होता।
कई श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई का हिस्सा भगवान को समर्पित करते हैं।
किसी भी प्रकार की कथित हेराफेरी की खबर से श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
इसीलिए जांच एजेंसी की कार्रवाई का उद्देश्य केवल दोषी व्यक्ति की पहचान करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में भरोसा कायम करना भी हो सकता है।
जांच का दायरा बढ़ने की संभावना
राजेंद्र चौहान की गिरफ्तारी के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि SIT आगे भी कुछ लोगों से पूछताछ कर सकती है।
जांच टीम चढ़ावा गणना से जुड़े कर्मचारियों, अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर सकती है।
इसके साथ ही दस्तावेजी रिकॉर्ड और CCTV फुटेज की और गहराई से जांच हो सकती है।
क्या और गिरफ्तारियां होंगी?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मामले में आगे कितनी गिरफ्तारियां होंगी।
SIT को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई करनी होगी।
यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है और पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
न्यायालय में पेशी
रिपोर्ट के अनुसार राजेंद्र सिंह चौहान को गिरफ्तारी के बाद न्यायालय में पेश किया जाना है। इसके बाद अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी।
किसी भी आरोपी की हिरासत, पूछताछ या अन्य कानूनी कार्रवाई का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होता है।
आरोपी का पक्ष भी महत्वपूर्ण
किसी भी आपराधिक मामले में जांच एजेंसी के आरोपों के साथ आरोपी का पक्ष भी महत्वपूर्ण होता है।
गिरफ्तारी का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है।
अंतिम फैसला साक्ष्यों, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला
इस मामले में मुख्य आरोपित बताए गए प्रमोद नौटियाल ने अपनी गिरफ्तारी से पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख भी किया था।
रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अपने निलंबन आदेश और FIR को चुनौती दी थी।
यह घटनाक्रम बताता है कि मामला केवल पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी स्तर पर भी इसकी गतिविधियां सामने आईं।
मंदिर समिति की जिम्मेदारी
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति मंदिरों की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
चढ़ावा प्रबंधन, कर्मचारी तैनाती और रिकॉर्डिंग जैसी व्यवस्थाओं में समिति की भूमिका होती है।
ऐसे में जांच के परिणामों के आधार पर भविष्य में मंदिर समिति की आंतरिक प्रक्रियाओं में बदलाव की जरूरत पर भी विचार किया जा सकता है।
भविष्य में क्या बदल सकता है?
इस मामले के बाद मंदिरों में चढ़ावा प्रबंधन की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत पर चर्चा हो सकती है।
इसके लिए कई उपाय अपनाए जा सकते हैं:
गणना कक्ष में सीमित और अधिकृत कर्मचारियों की एंट्री
हर स्तर पर डिजिटल रिकॉर्ड
CCTV की लगातार निगरानी
नकदी की दोहरी जांच
कर्मचारियों की नियमित रोटेशन
अचानक निरीक्षण
डिजिटल दान को बढ़ावा
चढ़ावे के रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट
इन उपायों से भविष्य में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता को रोकने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल दान का बढ़ता चलन
देश के कई मंदिरों में डिजिटल दान की सुविधा बढ़ रही है।
UPI और ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से श्रद्धालु सीधे मंदिर के अधिकृत खाते में दान कर सकते हैं।
इससे नकदी संभालने की आवश्यकता कुछ हद तक कम हो सकती है।
हालांकि नकद चढ़ावे को पूरी तरह समाप्त करना हर धार्मिक स्थल के लिए व्यावहारिक नहीं है।
नकदी प्रबंधन में सख्ती जरूरी
जहां नकद चढ़ावा बड़ी मात्रा में आता है, वहां मजबूत cash management system की आवश्यकता होती है।
नकदी की गिनती से लेकर बैंक में जमा होने तक हर चरण में रिकॉर्ड होना चाहिए।
यदि किसी चरण में रिकॉर्डिंग कमजोर होती है तो कथित हेराफेरी की संभावना बढ़ सकती है।
कर्मचारियों की जवाबदेही
चढ़ावा गणना कक्ष में काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए।
किस कर्मचारी ने कब ड्यूटी की, किस बैच की गणना की और किस अधिकारी को राशि सौंपी—इन सबका रिकॉर्ड होना चाहिए।
इससे किसी भी विवाद की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना आसान होता है।
स्वतंत्र ऑडिट की जरूरत
धार्मिक संस्थानों के वित्तीय प्रबंधन में समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट महत्वपूर्ण हो सकता है।
ऑडिट से रिकॉर्ड और वास्तविक लेनदेन के बीच अंतर का पता लगाया जा सकता है।
यदि कोई विसंगति सामने आती है तो समय रहते जांच की जा सकती है।
SIT जांच से क्या उम्मीद?
SIT की जांच का उद्देश्य पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाना है।
लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में कितने लोगों की भूमिका सामने आती है और कथित अनियमितताओं की वास्तविक मात्रा कितनी थी।
जांच पूरी होने के बाद ही मामले की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का व्यापक सवाल
बद्रीनाथ मामले ने देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में दान और चढ़ावे की सुरक्षा पर भी चर्चा को जन्म दे सकता है।
जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, वहां वित्तीय प्रबंधन के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होना जरूरी है।
आधुनिक तकनीक और पारदर्शी प्रक्रियाएं इसमें मदद कर सकती हैं।
प्रशासन के लिए चुनौती
मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
इसके साथ दान और चढ़ावे का प्रबंधन भी बड़े स्तर पर करना पड़ता है।
ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए आधुनिक वित्तीय और सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।
श्रद्धालुओं के भरोसे की बहाली
मामले की निष्पक्ष जांच श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
यदि दोषी पाए जाने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होती है और व्यवस्था में सुधार किए जाते हैं तो इससे सकारात्मक संदेश जा सकता है।
साथ ही यह भी जरूरी है कि बिना पर्याप्त साक्ष्य किसी व्यक्ति को दोषी घोषित न किया जाए।
जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों का इस्तेमाल
CCTV फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन जैसे साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि इन सभी को आपस में मिलाकर देखा जाता है तो कथित घटनाओं की पूरी श्रृंखला को समझना आसान हो सकता है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
राजेंद्र सिंह चौहान की गिरफ्तारी के बाद अब SIT की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
जांच टीम अन्य कर्मचारियों से पूछताछ कर सकती है और चढ़ावा गणना से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल सकती है।
प्रमोद नौटियाल और राजेंद्र चौहान से जुड़े तथ्यों का भी आपस में मिलान किया जा सकता है।