बिना TET 12 हजार शिक्षकों की सेवा पर संकट, न्यायालय के फैसले के बाद स्थिति गंभीर

Update: 2026-06-04 11:24 GMT

Uttarakhand उत्तराखंड : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद बिना टीईटी पास किए हुए करीब 12 हजार शिक्षकों की सेवा पर संकट लटक गया है। यह स्थिति पूरे शिक्षा तंत्र और प्रभावित शिक्षकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक वर्ष से संगठन द्वारा किए जा रहे विरोध पर प्रभावी नहीं दिख रहा है। संगठन का कहना है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा एक अनिवार्य शर्त के रूप में लागू की जा रही है और इसके बिना शिक्षकों की सेवा नियमावली के तहत आगे काम करना मुश्किल हो जाएगा।

शिक्षक संघ का सुझाव है कि इस समस्या का समाधान दो ही तरीकों से संभव है। पहला विकल्प यह है कि बेसिक और जूनियर स्तर के वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करें। दूसरा विकल्प यह है कि प्रदेश सरकार शिक्षकों की सेवा नियमावली में संशोधन करे ताकि बिना टीईटी पास किए हुए शिक्षक अपनी सेवा जारी रख सकें।

संघ का कहना है कि नियमावली में संशोधन के जरिए 55 वर्ष से कम आयु के करीब 12 हजार शिक्षक अपनी सेवाएं जारी रख सकते हैं। इसके अभाव में शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है, जो न केवल शिक्षकों के लिए बल्कि शिक्षा विभाग के लिए भी गंभीर धक्का होगा।

शिक्षक संगठन लगातार सरकार और न्यायालय से अपील कर रहा है कि इस मामले में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिया जाए। उनके अनुसार, शिक्षा क्षेत्र में लंबे समय से कार्यरत और अनुभवी शिक्षक बिना किसी गलती के अपने करियर और सेवा के संकट में पड़ सकते हैं। संगठन का कहना है कि बिना टीईटी पास किए हुए शिक्षकों को नौकरी से हटाना शिक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, शिक्षकों की सेवा और टीईटी लागू करने के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। न्यायालय ने टीईटी को अनिवार्य कर दिया है, लेकिन नियमावली में संशोधन की संभावना पर फिलहाल कोई स्पष्ट दिशा नहीं दी गई है।

इस मुद्दे से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रदेश सरकार को शिक्षकों के हित और शिक्षा गुणवत्ता दोनों को ध्यान में रखते हुए एक ठोस नीति बनानी होगी। उनका कहना है कि अनुभव और कार्यकाल को महत्व देने वाले शिक्षक शिक्षा तंत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं।

इस विवाद के समाधान के लिए अभी तक कोई स्थायी मार्ग नहीं निकला है। शिक्षक संघ और शिक्षा विभाग के बीच बातचीत जारी है, लेकिन जल्द ही निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा तंत्र में शैक्षणिक गतिविधियों पर असर न पड़े।

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