लखनऊ : उत्तर प्रदेश से निर्यात बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए योगी सरकार प्रमुख निर्यातक जिलों में डेडिकेटेड ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित करने की तैयारी कर रही है। इन केंद्रों पर निर्यातकों को कारोबार से जुड़ी सलाह, दस्तावेज तैयार करने, बाजार अनुसंधान, ब्रांडिंग, ऋण और बीमा सहित कई सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी। निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो ने इसके लिए जिलों से प्रस्ताव मांगे हैं।प्रदेश में दो तरह के केंद्र स्थापित करने की योजना है। वस्तुओं का अधिक निर्यात करने वाले जिलों में मर्चेंडाइज ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर यानी एमटीएफसी बनाए जाएंगे। वहीं सेवा क्षेत्र के निर्यातकों के लिए सर्विसेज ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर यानी एसटीएफसी स्थापित किए जाएंगे।
केंद्रों पर खर्च होंगे 10 करोड़ रुपये
मर्चेंडाइज ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना के लिए 7.5 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान प्रस्तावित है। सेवा क्षेत्र के प्रमुख केंद्र गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा में सर्विसेज ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर बनाने की तैयारी है। इस केंद्र की स्थापना पर 2.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।दोनों प्रकार के केंद्र निर्यातकों और सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे। इनका उद्देश्य सरकारी सहायता, प्रोत्साहन योजनाओं और निर्यात से संबंधित सुविधाओं की जानकारी पात्र कारोबारियों तक आसानी से पहुंचाना है।
दस्तावेज से मार्केट रिसर्च तक मिलेगी मदद
ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर उत्पादों की ब्रांडिंग, दस्तावेज तैयार करने और निर्यात प्रक्रिया से जुड़ी सलाह प्रदान करेंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग, उत्पादों की कीमत, गुणवत्ता के मानक और प्रतिस्पर्धा से जुड़ी जानकारी भी निर्यातकों को उपलब्ध कराई जाएगी।केंद्र मार्केट इंटेलिजेंस और व्यापार से संबंधित आंकड़े कारोबारियों के साथ साझा करेंगे। इसके अतिरिक्त नए बाजारों तक पहुंच बनाने, कारोबार का विस्तार करने, कर्ज और बीमा की सुविधा प्राप्त करने में भी सहयोग दिया जाएगा।प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के लिए मोबाइल यूनिट भी गठित की जाएगी। यह इकाई प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर निर्यातकों को आवश्यक जानकारी देगी। इसके माध्यम से वस्तु और सेवा क्षेत्र से जुड़े निर्यातकों का विस्तृत डाटाबेस भी तैयार किया जाएगा।
वन स्टॉप डिजिटल इन्फॉर्मेशन हब बनेगा
प्रदेश की निर्यात प्रोत्साहन नीति में वन स्टॉप डिजिटल इन्फॉर्मेशन हब बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इस ऑनलाइन व्यवस्था का उद्देश्य निर्यातकों को उपयोग में आसान डिजिटल टूल, लक्षित मार्गदर्शन और विभागों से सरल संवाद की सुविधा उपलब्ध कराना है।डिजिटल हब के माध्यम से डेडिकेटेड हेल्पडेस्क, हेल्पलाइन, वीडियो ट्यूटोरियल और एआई चैटबॉट की सुविधा दी जाएगी। निर्यातक व्यापार मेलों, गुणवत्ता मानकों, मुक्त व्यापार समझौतों के लाभ और निर्यात संसाधनों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।सरकार का विशेष ध्यान एक जिला एक उत्पाद यानी ओडीओपी योजना से जुड़े उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर रहेगा। निर्यातकों को उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने, अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, परीक्षण प्रयोगशाला और वैश्विक मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
ये हैं प्रदेश के प्रमुख निर्यातक जिले
उत्तर प्रदेश के प्रमुख निर्यातक जिलों में गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, भदोही, उन्नाव, अमरोहा, संभल, मेरठ, सोनभद्र, लखनऊ और हापुड़ शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कुल निर्यात में अकेले नोएडा की हिस्सेदारी लगभग 51 प्रतिशत है।नोएडा से स्मार्टफोन, आभूषण, सूती कपड़े, सिंथेटिक फाइबर और बोनलेस मीट का निर्यात किया जाता है। गाजियाबाद से आयरन-स्टील, दवाएं और धातु उत्पाद, जबकि कानपुर से चमड़े का सामान, फुटवियर तथा आयरन-स्टील उत्पाद विदेश भेजे जाते हैं।आगरा चमड़े के जूते और पत्थर उत्पादों, अलीगढ़ मेटल उत्पादों, भदोही हस्तनिर्मित कालीन तथा मेरठ खेल उत्पादों और एयरक्राफ्ट पार्ट्स के लिए जाना जाता है। उन्नाव से फुटवियर एवं सैडलरी और संभल से मेंथा एवं सुगंधित तेल का निर्यात होता है।सोनभद्र से एल्युमिनियम एवं कोयला उत्पाद, लखनऊ से मशीनरी, आयरन-स्टील और चिकनकारी कपड़े तथा हापुड़ से आयरन-स्टील, पेपर पल्प, मिलिंग उत्पाद और दवाएं निर्यात की जाती हैं। प्रस्तावित केंद्र इन जिलों के छोटे और मध्यम निर्यातकों को वैश्विक बाजार तक पहुंचने में विशेष सहयोग देंगे।