लखनऊ। दीपावली से पहले उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 30 दिन के तदर्थ बोनस के भुगतान का शासनादेश जारी कर दिया गया है। इस फैसले का लाभ प्रदेश के करीब 14.82 लाख अराजपत्रित कर्मचारियों और अन्य पात्र कर्मियों को मिलेगा। सरकार के इस निर्णय से राज्य कर्मचारियों के साथ-साथ सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, प्राविधिक शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
दीपावली के त्योहार से पहले बोनस की घोषणा होने से कर्मचारियों और उनके परिवारों में खुशी का माहौल है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र कर्मचारियों को अधिकतम 6,908 रुपये तक का बोनस दिया जाएगा। बोनस की गणना वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी। हालांकि, सभी कर्मचारियों को एक समान राशि नहीं मिलेगी। वास्तविक भुगतान उनकी पात्रता, वेतन और सेवा संबंधी शर्तों पर निर्भर करेगा।जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, बोनस का लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा, जो किसी उत्पादकता आधारित बोनस योजना के अंतर्गत नहीं आते हैं। सरकार ने पात्रता और भुगतान के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित की हैं, ताकि संबंधित विभाग नियमानुसार कर्मचारियों को इसका लाभ दे सकें।
प्रदेश सरकार के फैसले के तहत वेतन मैट्रिक्स के लेवल-8 तक के पदों पर कार्यरत अराजपत्रित कर्मचारी बोनस पाने के पात्र होंगे। पुराने वेतनमान के अनुसार यह सीमा 4,800 रुपये ग्रेड पे तक निर्धारित की गई है। जिन कर्मचारियों को वित्तीय उन्नयन की वजह से अधिक वेतनमान मिला है, उनकी पात्रता उनके मूल पद के आधार पर तय की जाएगी। इससे स्पष्ट होता है कि बोनस का लाभ केवल मौजूदा वेतन के आधार पर निर्धारित नहीं होगा।सरकार ने बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक परिलब्धि 7,000 रुपये तय की है। इसी आधार पर 30 दिन के तदर्थ बोनस की अधिकतम राशि 6,908 रुपये निर्धारित की गई है। यह राशि निर्धारित गणना प्रक्रिया के अनुसार दी जाएगी। कर्मचारियों को मिलने वाली वास्तविक बोनस राशि शासनादेश में तय नियमों के आधार पर निकाली जाएगी।
इस योजना का लाभ लेने के लिए कर्मचारियों को कुछ सेवा संबंधी शर्तें भी पूरी करनी होंगी। शासनादेश के अनुसार, नियमित कर्मचारियों को 31 मार्च 2026 तक कम से कम एक वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करना आवश्यक है। जिन कर्मचारियों ने यह शर्त पूरी नहीं की है, वे निर्धारित नियमों के अनुसार बोनस के पात्र नहीं होंगे।इसके साथ ही सरकार ने अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित प्रावधान भी स्पष्ट किए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान किसी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मामले में दंडित कर्मचारियों को बोनस नहीं मिलेगा। जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच या आपराधिक मुकदमे लंबित हैं, उनका बोनस फिलहाल रोका जा सकता है। बाद में दोषमुक्त होने पर निर्धारित नियमों के अनुसार भुगतान किया जा सकेगा।
योगी सरकार ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी इस फैसले में शामिल किया है। हालांकि, इनके लिए अलग पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। ऐसे कर्मचारियों को 31 मार्च 2026 तक लगातार तीन वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी। छह दिन के कार्य सप्ताह वाले संस्थानों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन तथा पांच दिन के कार्य सप्ताह वाले संस्थानों में कम से कम 206 दिन काम करना आवश्यक होगा।दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बोनस की गणना हेतु अधिकतम मासिक परिलब्धि 1,200 रुपये निर्धारित की गई है। इस आधार पर उन्हें अधिकतम 1,184 रुपये तक बोनस मिल सकेगा। सरकार का यह फैसला उन पात्र कर्मचारियों के लिए भी राहत लेकर आया है, जो दैनिक वेतन पर विभिन्न विभागों और संस्थानों में कार्यरत हैं।
बोनस के भुगतान की प्रक्रिया को लेकर भी शासनादेश में महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। आदेश के मुताबिक, पात्र कर्मचारियों की बोनस राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा उनके भविष्य निधि खाते में जमा किया जाएगा, जबकि शेष 25 प्रतिशत का नकद भुगतान होगा। जिन कर्मचारियों का भविष्य निधि खाता नहीं है, उनकी संबंधित राशि राष्ट्रीय बचत पत्र या सार्वजनिक भविष्य निधि खाते में जमा कराई जाएगी।हालांकि, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। ऐसे पात्र कर्मचारी, जो 31 मार्च 2026 के बाद सेवानिवृत्त हो चुके हैं या 30 अप्रैल 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले हैं, उन्हें बोनस की पूरी राशि नकद दी जाएगी। इस प्रावधान से सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा।
सरकार के इस फैसले का असर प्रदेश के लाखों परिवारों पर पड़ेगा। दीपावली के दौरान घरेलू खर्च, खरीदारी और त्योहार की तैयारियों में बढ़ोतरी होती है। ऐसे समय में बोनस की घोषणा कर्मचारियों के लिए आर्थिक सहायता का काम कर सकती है। हालांकि, अधिकांश पात्र कर्मचारियों को बोनस का एक हिस्सा ही नकद मिलेगा, जबकि शेष राशि बचत के रूप में जमा की जाएगी।आर्थिक दृष्टि से भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। त्योहारों के दौरान कर्मचारियों की अतिरिक्त आय से स्थानीय बाजारों में खरीदारी बढ़ सकती है। कपड़े, घरेलू सामान, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और अन्य आवश्यक वस्तुओं की मांग को इससे कुछ समर्थन मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने दीपावली से पहले कर्मचारियों को बोनस देने के फैसले के जरिए उन्हें आर्थिक राहत पहुंचाने की पहल की है। शासनादेश जारी होने के बाद अब संबंधित विभागों को पात्र कर्मचारियों का विवरण तैयार कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।फिलहाल प्रदेश के लाखों कर्मचारी बोनस की राशि मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार के आदेश के अनुसार सभी विभागों को पात्रता की जांच और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। ऐसे में दीपावली से पहले बोनस की घोषणा उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी बनकर सामने आई है।
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