गोरखपुर में 1 घंटे खड़ी रही वैशाली सुपरफास्ट: गार्ड की कुर्सी टूटने पर बढ़ा विवाद
गोरखपुर। नई दिल्ली से गोरखपुर होते हुए ललितग्राम (बिहार) की ओर जाने वाली 15566 वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस में उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब ट्रेन के गार्ड (ट्रेन मैनेजर) की बोगी में रखी कुर्सी टूट गई। गार्ड ने टूटी कुर्सी के साथ आगे का लंबा सफर तय करने से स्पष्ट इनकार कर दिया और ट्रेन को गोरखपुर जंक्शन पर ही रोक दिया।ट्रेन के रुकने से रेलवे प्रशासन और परिचालन विभाग के अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए। करीब एक घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे और अधिकारियों द्वारा आगे के स्टेशन पर बैठने का समुचित इंतजाम कराने के लिखित व मौखिक आश्वासन के बाद गार्ड शांत हुए और ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया जा सका।
क्या है पूरा मामला?
नई दिल्ली से चलकर ललितग्राम जाने वाली 15566 वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर गोरखपुर जंक्शन पहुंची। गोरखपुर स्टेशन पर ट्रेन के क्रू (चालक दल और गार्ड) का बदलाव होना था। जब नए ट्रेन मैनेजर (गार्ड) अपनी ड्यूटी संभालने के लिए ट्रेन के सबसे पिछले डिब्बे यानी ब्रेक वैन (Guard Van) में पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर वे भड़क गए।
गार्ड के बैठने के लिए ब्रेक वैन में लगाई गई कुर्सी पूरी तरह से टूटी हुई और बदहाल स्थिति में थी। ट्रेन मैनेजर ने अधिकारियों को अवगत कराया कि इतने लंबे रेल मार्ग पर बिना बैठने की सही व्यवस्था के ड्यूटी करना न केवल शारीरिक रूप से कष्टदायक है, बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी जोखिम भरा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि जब तक नई कुर्सी की व्यवस्था नहीं होगी, वे ट्रेन को आगे नहीं ले जाएंगे।
रेलकर्मियों और अधिकारियों में मचा हड़कंप
ट्रेन मैनेजर के ड्यूटी पर जाने से इनकार करते ही गोरखपुर जंक्शन के स्टेशन मास्टर, मैकेनिकल विंग और ऑपरेटिंग विभाग के वरिष्ठ रेलकर्मियों के हाथ-पैर फूल गए। वैशाली एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण और व्यस्त सुपरफास्ट ट्रेन का जंक्शन पर अचानक रुकना पूरे रेल रूट के सिग्नलिंग और टाइमिंग को प्रभावित करने लगा था।
जैसे ही इस मामले की भनक पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के उच्च अधिकारियों को लगी, हड़कंप मच गया। ऑपरेटिंग विभाग और तकनीकी टीम के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और ट्रेन मैनेजर को समझाने की कोशिश करने लगे।
अधिकारियों ने की मिन्नतें, दिया आगे कुर्सी देने का भरोसा
अधिकारियों ने गार्ड को समझाते हुए कहा कि इस समय स्टेशन पर तुरंत वैसी ही कुर्सी की वैकल्पिक व्यवस्था करने में समय लगेगा, जिससे ट्रेन काफी लेट हो जाएगी। उन्होंने अनुरोध किया कि:
ट्रेन को यहां से किसी तरह आगे के स्टेशन के लिए रवाना किया जाए।
अगले मुख्य स्टेशन (जहां कैरेज एंड वैगन विभाग का डिपो हो) पर प्राथमिकता के आधार पर नई कुर्सी या बैठने का पुख्ता इंतजाम कर दिया जाएगा।
ट्रेन में सवार सैकड़ों यात्रियों की सुविधा और आगे के रूट की गाड़ियों के परिचालन को ध्यान में रखते हुए सहयोग करें।
काफी मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद ट्रेन मैनेजर अधिकारियों के आश्वासन पर सहमत हुए और अपनी ड्यूटी संभालने के लिए हामी भरी। इसके बाद ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर आगे के लिए रवाना किया गया।
1 घंटे लेट हुई ट्रेन, यात्री रहे परेशान
इस पूरे घटनाक्रम के चलते वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस गोरखपुर जंक्शन पर लगभग 1 घंटे तक खड़ी रही। ट्रेन के अचानक रुके रहने से डिब्बों में बैठे यात्रियों में भारी असमंजस और बैचेनी देखने को मिली। गर्मी के मौसम में ट्रेन के आउटर और प्लेटफॉर्म पर बेवजह खड़े रहने से यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
रेल संरक्षा और ब्रेक वैन के रखरखाव पर उठे सवाल
इस घटना ने भारतीय रेलवे में ट्रेन मैनेजर (गार्ड) के डिब्बों (एसएलआर/ब्रेक वैन) की बदहाल स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेल कर्मचारी यूनियनों का अक्सर यह आरोप रहता है कि यात्रियों के डिब्बों के साथ-साथ रनिंग स्टाफ (लोको पायलट और गार्ड) के केबिनों के रखरखाव पर उचित ध्यान नहीं दिया जाता। कई बार जर्जर कुर्सियां, पंखे खराब होना या लाइट न होना जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं। गोरखपुर में हुई यह घटना रेलवे के मैकेनिकल और मेंटेनेंस विभाग की लापरवाही को उजागर करती है।