मुरादाबाद। ग्रीन बेल्ट में पेड़-पौधों के बीच कई आयोजकों की ओर से भंडारे के शिविर लगाए गए थे। नगर निगम अधिकारियों ने हरियाली और पौधों को नुकसान की आशंका जताते हुए आयोजकों से शिविर हटाकर फुटपाथ के बाहर निर्धारित स्थान पर लगाने को कहा। निर्देश के बाद भी सामान नहीं हटाए जाने पर प्रवर्तन टीम ने कार्रवाई की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली रोड के किनारे ग्रीन बेल्ट में विभिन्न स्थानों पर भंडारे के लिए अस्थायी शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों में भंडारे की व्यवस्था के लिए टेंट, टेबल, बर्तन और अन्य सामान रखा गया था। कई जगहों पर शिविर सीधे पेड़-पौधों और हरियाली के बीच लगाए गए थे।

नगर निगम अधिकारियों का कहना था कि ग्रीन बेल्ट का उद्देश्य सड़क किनारे हरियाली को संरक्षित रखना है। ऐसे में वहां किसी तरह का अस्थायी निर्माण या आयोजन किए जाने से पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगों के जुटने और भंडारे की व्यवस्था के कारण ग्रीन बेल्ट में कूड़ा फैलने तथा हरियाली प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई।

अपर नगर आयुक्त के नेतृत्व में पहुंची टीम

मामले की जानकारी मिलने के बाद अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह और नगर निगम की प्रवर्तन दल की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने भंडारा आयोजकों से बातचीत की और उन्हें ग्रीन बेल्ट में लगाए गए शिविर हटाने के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने आयोजकों से कहा कि वे भंडारे की व्यवस्था ग्रीन बेल्ट के बजाय फुटपाथ के बाहर करें, ताकि पेड़-पौधों और हरियाली को किसी तरह का नुकसान न हो। अधिकारियों के मुताबिक, आयोजकों को मौके पर ही स्थिति स्पष्ट करते हुए सामान हटाने के लिए कहा गया था।

निर्देश के बाद भी नहीं हटाया सामान

नगर निगम टीम के निर्देश के बावजूद आयोजकों की ओर से तत्काल सामान हटाने की कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद प्रवर्तन दल ने मौके पर रखे सामान को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया।

टीम ने सामान को ट्रैक्टर-ट्राली में भरने की कोशिश की। इसी दौरान भंडारा आयोजकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। आयोजकों और नगर निगम कर्मचारियों के बीच कहासुनी होने लगी। देखते ही देखते मामला विवाद में बदल गया।

ट्रैक्टर-ट्राली में सामान भरने पर बढ़ा विवाद

प्रवर्तन दल की ओर से सामान हटाने का प्रयास किए जाने पर आयोजकों ने विरोध जताया। दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ने के साथ स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कुछ देर के लिए मौके पर खींचतान और हाथापाई जैसी स्थिति भी बन गई।

घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ भी जमा हो गई। इससे सड़क के आसपास कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। नगर निगम की टीम और आयोजकों के बीच हुए विवाद को लेकर मौके पर मौजूद लोगों में भी चर्चा शुरू हो गई।

हरियाली बचाने का निगम का तर्क

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों और विशेष रूप से ग्रीन बेल्ट में किसी आयोजन के कारण पेड़-पौधों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। शहर में हरियाली को बनाए रखने के लिए ग्रीन बेल्ट विकसित की जाती हैं। इन स्थानों पर अस्थायी शिविर लगाने से पौधों को नुकसान के साथ-साथ मिट्टी और हरित क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है।

इसी वजह से प्रवर्तन टीम ने आयोजकों को शिविर हटाकर वैकल्पिक स्थान पर व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक या सामाजिक आयोजन करने से किसी को रोका नहीं जा रहा था, बल्कि आयोजन के लिए ग्रीन बेल्ट के बजाय उचित स्थान का इस्तेमाल करने को कहा गया था।

आयोजकों ने जताया विरोध

दूसरी ओर, भंडारा आयोजकों ने सामान हटाने की कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना था कि उन्होंने भंडारे के लिए अस्थायी व्यवस्था की थी और वहां लोगों को भोजन कराया जा रहा था। सामान को जबरन हटाने की कोशिश पर उन्होंने आपत्ति जताई।

इसी को लेकर दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति बनी। हालांकि विवाद का मुख्य केंद्र ग्रीन बेल्ट में शिविर लगाए जाने और वहां से सामान हटाने की कार्रवाई रहा।

आगे की कार्रवाई पर नजर

घटना के बाद नगर निगम की प्रवर्तन टीम और आयोजकों के बीच विवाद ने ग्रीन बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के लिए लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक हरियाली और पर्यावरण की सुरक्षा भी नगर निगम की जिम्मेदारी है।

ऐसे में आने वाले समय में नगर निगम द्वारा ग्रीन बेल्ट में अस्थायी शिविर लगाने को लेकर और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है। अधिकारियों का जोर इस बात पर रहेगा कि सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के दौरान शहर की हरियाली तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचे।

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