मेरठ : मानसून के मौसम में जहां बारिश के बाद हवा साफ होने की उम्मीद रहती है, वहीं मेरठ में इसके उलट स्थिति देखने को मिल रही है। सोमवार को मेरठ की वायु गुणवत्ता देश में सबसे खराब दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, शाम चार बजे शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 325 दर्ज किया गया, जो रेड श्रेणी में आता है।
प्रदूषण का यह स्तर लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है, क्योंकि आमतौर पर मानसून के दौरान बारिश से धूल और प्रदूषक तत्व कम हो जाते हैं और हवा की गुणवत्ता बेहतर होती है। लेकिन मेरठ में बारिश के बाद भी प्रदूषण का स्तर बढ़ता हुआ नजर आया।
सोमवार को देश के 241 शहरों की वायु गुणवत्ता की निगरानी की गई। इनमें केवल दो शहर ऐसे रहे जहां AQI रेड श्रेणी में पहुंचा। मेरठ सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर रहा, जबकि ग्रेटर नोएडा दूसरे स्थान पर रहा। ग्रेटर नोएडा का AQI 303 दर्ज किया गया।
AQI 300 या उससे अधिक होने पर हवा की स्थिति बेहद खराब मानी जाती है। इस स्तर पर प्रदूषण का असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को परेशानी बढ़ने की आशंका रहती है।
मेरठ में पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे खतरनाक प्रदूषक तत्वों की मात्रा भी काफी अधिक पाई गई। ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से फेफड़ों और हृदय से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
हैरानी की बात यह है कि करीब पांच दिन पहले ही मेरठ की हवा पूरी तरह साफ श्रेणी में पहुंच गई थी। उस समय शहर का AQI केवल 47 दर्ज किया गया था। लेकिन इसके बाद मौसम में बदलाव और वातावरण में नमी बढ़ने के साथ प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता गया।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वातावरण में नमी की मात्रा अधिक होने और हवा की गति कम रहने के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा हो रहे हैं। हवा की रफ्तार कम होने से धूल और धुएं के कणों का फैलाव नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है।
उन्होंने बताया कि सड़कों से उड़ने वाली धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं और अन्य स्थानीय कारण भी प्रदूषण बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। बारिश के बाद सड़कों पर जमा मिट्टी और धूल सूखने के बाद हवा में मिल रही है, जिससे पीएम 10 का स्तर बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान भी अगर हवा की गति कम हो और वातावरण में नमी अधिक हो तो प्रदूषक तत्व जमीन के पास जमा हो सकते हैं। इससे वायु गुणवत्ता खराब हो जाती है।
प्रदूषण बढ़ने के कारण लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि खराब हवा के दौरान सुबह और शाम के समय खुले में ज्यादा समय बिताने से बचना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
मेरठ जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में बढ़ते वाहनों की संख्या, निर्माण कार्य, सड़क की धूल और औद्योगिक गतिविधियां भी वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। प्रशासन समय-समय पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए कदम उठाता है, लेकिन मौसम की परिस्थितियां भी वायु गुणवत्ता को काफी प्रभावित करती हैं।
फिलहाल मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की नजर शहर की हवा की स्थिति पर बनी हुई है। अधिकारियों को उम्मीद है कि हवा की गति बढ़ने या बारिश होने के बाद प्रदूषण के स्तर में कमी आ सकती है।
मानसून के बीच मेरठ में बढ़ा प्रदूषण एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि शहर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए स्थायी उपायों की जरूरत है। आने वाले दिनों में हवा की स्थिति किस तरह बदलती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।