Uttar Pradesh उत्तरप्रदेश : मथुरा जिले के प्रसिद्ध राधा रानी धाम बरसाना में आस्था और समर्पण की एक अनोखी मिसाल देखने को मिल रही है। आगरा का 13 वर्षीय बालक आराध्य गुप्ता अपनी असाधारण भक्ति और दृढ़ संकल्प के चलते चर्चा का विषय बना हुआ है। आराध्य ने बरसाना धाम की लगभग 7 किलोमीटर लंबी पक्की परिक्रमा को हाथों के बल पूरा करने का कठिन संकल्प लिया है।
यह परिक्रमा न केवल शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी एक बड़ी परीक्षा मानी जाती है। इसके बावजूद आराध्य ने इसे अपनी स्वर्गीय दादी की स्मृति को समर्पित करते हुए पूरा करने का निश्चय किया है।
धार्मिक वातावरण में पला-बढ़ा आराध्य
आराध्य गुप्ता आगरा के प्रतीक विहार फेस-2 के निवासी हैं। उनके पिता कमलेश गुप्ता और माता सीमा गुप्ता के अनुसार, आराध्य बचपन से ही धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल में पले-बढ़े हैं। घर में पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों का प्रभाव उनके जीवन पर गहराई से पड़ा है।
परिवार का कहना है कि आराध्य की धार्मिक आस्था बचपन से ही काफी मजबूत रही है। वे नियमित रूप से पूजा-अर्चना में हिस्सा लेते हैं और धार्मिक यात्राओं में भी रुचि रखते हैं। यही कारण है कि उन्होंने एक ऐसा संकल्प लिया, जो आम लोगों के लिए बेहद कठिन माना जाता है।
हाथों के बल पूरी कर रहे परिक्रमा
आराध्य ने बरसाना धाम की परिक्रमा कल से शुरू की है। वे पूरे मार्ग को हाथों के बल तय कर रहे हैं, जो कि शारीरिक सहनशक्ति और आत्मविश्वास की बड़ी परीक्षा है। परिक्रमा मार्ग की लंबाई लगभग 7 किलोमीटर बताई जा रही है, जिसे इस तरह पूरा करना बेहद असामान्य और चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में आराध्य की इस भक्ति को लेकर काफी उत्साह और आश्चर्य देखने को मिल रहा है। कई लोग उनके संकल्प को देखकर प्रेरित हो रहे हैं और इसे आस्था की अनोखी शक्ति के रूप में देख रहे हैं।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर नजर
आराध्य की यह अनोखी कोशिश अब चर्चा में आ गई है और माना जा रहा है कि उनका यह प्रयास गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने की दिशा में भी देखा जा सकता है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनकी मेहनत और समर्पण को देखकर लोग इसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं।
आस्था और संकल्प का संदेश
आराध्य गुप्ता की यह यात्रा केवल एक परिक्रमा नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक बन गई है। अपनी दादी की स्मृति में लिया गया यह संकल्प लोगों को भावुक कर रहा है और साथ ही यह संदेश भी दे रहा है कि मजबूत इच्छाशक्ति से कठिन से कठिन लक्ष्य भी पूरा किया जा सकता है।