Meerut : पति की हत्या का सनसनीखेज मामला, ड्राइवर से संबंध के आरोप में पत्नी गिरफ्तार
मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। पुलिस के अनुसार, एक महिला पर आरोप है कि उसने अपने पति की हत्या की साजिश अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर रची। आरोप है कि पति को पहले दूध में नींद की गोलियां मिलाकर बेहोश किया गया और उसके बाद जहरीले सांप से डसवाकर उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने मामले की जांच के बाद महिला और उसके कथित प्रेमी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला का कथित तौर पर एक ड्राइवर के साथ प्रेम संबंध था। पुलिस का दावा है कि दोनों ने मिलकर पति को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। आरोप है कि घटना वाली रात महिला ने अपने पति को दूध में नींद की गोलियां मिलाकर पिला दीं, जिससे वह गहरी नींद में चला गया। इसके बाद कथित तौर पर जहरीले सांप का इस्तेमाल कर हत्या को प्राकृतिक दुर्घटना या सर्पदंश का मामला दिखाने की कोशिश की गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महिला पिछले लगभग एक वर्ष से देशभर में पतियों की हत्या से जुड़े चर्चित मामलों का अध्ययन कर रही थी। पुलिस का कहना है कि जांच में मिले डिजिटल साक्ष्यों से पता चला है कि वह इंटरनेट पर ऐसे मामलों की जानकारी जुटा रही थी और यह जानने का प्रयास कर रही थी कि किस प्रकार अपराध को अंजाम दिया जाए ताकि संदेह कम हो तथा जांच एजेंसियों से बचा जा सके।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, महिला कथित रूप से इंटरनेट पर तथाकथित "परफेक्ट क्राइम" से जुड़ी सामग्री भी देख रही थी। इसके अलावा उसने पुराने चर्चित मामलों का अध्ययन कर यह समझने की कोशिश की कि किन परिस्थितियों में पुलिस ने आरोपियों तक पहुंच बनाई और किन गलतियों के कारण अपराध का खुलासा हुआ। जांच में मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और ब्राउज़िंग हिस्ट्री का फॉरेंसिक परीक्षण भी कराया जा रहा है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर पहले हुए एक चर्चित सर्पदंश हत्या मामले का भी अध्ययन किया था। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने उस मामले में हुई जांच और उसके निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए अपनी योजना तैयार की। हालांकि, जांच एजेंसियों का दावा है कि आधुनिक तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया गया।
पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद शुरुआत में इसे सामान्य सर्पदंश का मामला माना गया था। लेकिन परिस्थितियों और कुछ संदिग्ध तथ्यों ने जांच अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच, मोबाइल फोन की जांच, कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को एकत्र किया गया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को हत्या की साजिश से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के अलावा डिजिटल उपकरणों की भी गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में मिले सभी साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत अभियोजन चलाया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि गंभीर अपराधों की योजना बनाने में इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का किस प्रकार दुरुपयोग किया जा सकता है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी का उपयोग जहां शिक्षा और शोध के लिए किया जाता है, वहीं कुछ मामलों में उसका दुरुपयोग भी देखने को मिलता है। हालांकि किसी अपराध की योजना बनाना और उसे अंजाम देना कानूनन गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण आधार बनते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हत्या के मामलों में केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर्याप्त नहीं होते, बल्कि पुलिस को अदालत में वैज्ञानिक और प्रत्यक्ष या पुष्ट परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करने होते हैं। इसलिए जांच एजेंसियां इस मामले में हर पहलू की सावधानीपूर्वक जांच कर रही हैं।
फिलहाल पुलिस ने मामले में संबंधित आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है और विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। इस सनसनीखेज मामले ने पूरे क्षेत्र में लोगों को स्तब्ध कर दिया है और अब सभी की निगाहें पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।