बांधवगढ़ से 250 किमी दूर प्रयागराज पहुंचे दो हाथी गांवों में दहशत वन विभाग अलर्ट
प्रयागराज। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले स्थित बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से भटककर निकला हाथियों का एक जोड़ा करीब 250 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज पहुंच गया है। दोनों हाथी 10 फरवरी को बांधवगढ़ क्षेत्र से निकले थे और कई जिलों की सीमाओं को पार करते हुए शुक्रवार रात प्रयागराज के कोरांव क्षेत्र में पहुंच गए। फिलहाल दोनों ने अतरेंजी जंगल में डेरा डाल रखा है। हाथियों की मौजूदगी की खबर फैलते ही आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। वन विभाग की टीम लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही है।
दोनों हाथियों के शरीर पर ट्रैकिंग चिप लगी हुई है, जिससे उनके मूवमेंट की निगरानी करने में वन विभाग को मदद मिल रही है। प्रयागराज के डीएफओ अरविंद कुमार यादव ने बताया कि बांधवगढ़ के अधिकारियों को हाथियों के यहां पहुंचने की सूचना दे दी गई है। अब दोनों को सुरक्षित तरीके से वापस भेजने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
10 फरवरी को बांधवगढ़ से निकले थे हाथी
जानकारी के मुताबिक दोनों हाथी 10 फरवरी को बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से बाहर निकल गए थे। इसके बाद उन्होंने लगातार आगे बढ़ते हुए लंबी दूरी तय की।
जंगलों और अन्य क्षेत्रों से गुजरते हुए हाथियों का यह जोड़ा अलग-अलग जिलों की सीमाओं को पार करता रहा। करीब 250 किलोमीटर की यात्रा के बाद दोनों प्रयागराज जिले के कोरांव क्षेत्र तक पहुंच गए।
शुक्रवार रात दोनों हाथियों को अतरेंजी जंगल के आसपास देखा गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग को जानकारी दी और टीमों को सतर्क कर दिया गया।
अतरेंजी जंगल में डाला डेरा
दोनों हाथियों ने फिलहाल कोरांव के अतरेंजी जंगल में डेरा डाल रखा है। वन विभाग उनके अगले मूवमेंट का इंतजार कर रहा है और इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि वे आबादी वाले इलाकों की ओर न बढ़ें।
हाथी लंबी दूरी तय करने में सक्षम होते हैं और भोजन तथा पानी की तलाश में एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक जा सकते हैं। ऐसे में उनके अगले रास्ते का सटीक अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
वन विभाग की टीम इलाके में तैनात है और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है।
आसपास के गांवों में दहशत
जंगल में दो हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद आसपास के ग्रामीणों में डर का माहौल है। खासकर जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा जा रहा है।
हाथियों के आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचने पर जान-माल और फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए वन विभाग की प्राथमिकता दोनों हाथियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
लोगों को हाथियों के करीब नहीं जाने और उन्हें परेशान नहीं करने की सलाह दी जा सकती है। हाथियों को घेरने, तेज आवाज करने या उनके साथ फोटो और वीडियो बनाने की कोशिश जोखिमपूर्ण हो सकती है।
शरीर पर लगी है ट्रैकिंग चिप
दोनों हाथियों के शरीर पर ट्रैकिंग चिप लगी होने के कारण वन विभाग उनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा पा रहा है।
वन्यजीवों पर लगाई जाने वाली ट्रैकिंग तकनीक उनके आवागमन और व्यवहार को समझने में मदद करती है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि कोई जानवर किस दिशा में बढ़ रहा है और किन क्षेत्रों से होकर गुजर रहा है।
इस मामले में भी ट्रैकिंग से दोनों हाथियों के मूवमेंट की निगरानी में मदद मिलने की उम्मीद है।
बांधवगढ़ के अधिकारियों को दी गई सूचना
डीएफओ अरविंद कुमार यादव ने बताया कि हाथियों के प्रयागराज पहुंचने की जानकारी बांधवगढ़ के संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है।
दोनों राज्यों के वन विभाग के बीच समन्वय के जरिए आगे की रणनीति तय की जा सकती है। इसमें हाथियों के पुराने मूवमेंट, व्यवहार और उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस भेजने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
वन्यजीवों से जुड़े ऐसे मामलों में जल्दबाजी से बचते हुए विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर कदम उठाना महत्वपूर्ण होता है।
वापसी के विकल्पों पर हो रहा विचार
वन विभाग अब इस बात पर विचार कर रहा है कि दोनों हाथियों को किस तरह सुरक्षित रूप से उनके मूल क्षेत्र की दिशा में वापस भेजा जाए।
हाथियों को सीधे पकड़कर स्थानांतरित करना हमेशा पहला विकल्प नहीं होता। कई मामलों में वन विभाग उनकी प्राकृतिक गतिविधियों पर नजर रखते हुए उन्हें आबादी से दूर सुरक्षित रास्ते की ओर मोड़ने का प्रयास करता है।
इस दौरान स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, जंगलों की उपलब्धता और आसपास की आबादी को ध्यान में रखना पड़ता है।
कई जिलों की सीमाएं पार कर पहुंचे
बांधवगढ़ से प्रयागराज तक हाथियों का पहुंचना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दोनों ने करीब 250 किलोमीटर की दूरी तय की है। इस दौरान उन्होंने कई जिलों की सीमाएं पार कीं।
इतनी लंबी दूरी तक हाथियों का मूवमेंट वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी अध्ययन का विषय हो सकता है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि दोनों ने बांधवगढ़ क्षेत्र क्यों छोड़ा और किन रास्तों का इस्तेमाल करते हुए प्रयागराज तक पहुंचे।
ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
अतरेंजी जंगल और आसपास के क्षेत्रों में वन विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि वे हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
यदि हाथी आबादी की तरफ बढ़ते हैं तो इसकी जानकारी तत्काल वन विभाग को देना जरूरी होगा। लोगों को खुद हाथियों को भगाने या उनके करीब जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
रात के समय जंगल के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचना भी सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है।
लगातार निगरानी कर रहा वन विभाग
फिलहाल दोनों हाथी अतरेंजी जंगल में मौजूद बताए जा रहे हैं। वन विभाग उनकी गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रहा है और बांधवगढ़ के अधिकारियों के साथ संपर्क में है।
अधिकारियों की प्राथमिकता हाथियों और स्थानीय आबादी दोनों को सुरक्षित रखना है। अब यह देखा जा रहा है कि हाथियों का अगला मूवमेंट किस दिशा में होता है और उन्हें बांधवगढ़ की ओर वापस भेजने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाई जाती है।