फर्जी सॉफ्टवेयर से टोल वसूली का खेल बेनकाब ED की छापेमारी में बड़ा खुलासा
लखनऊ : नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के टोल प्लाजा पर कथित फर्जीवाड़े और अवैध वसूली के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने कई राज्यों में छापेमारी कर 1.03 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा जांच एजेंसी ने 8 बैंक लॉकर फ्रीज कर दिए हैं। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड भी बरामद किए गए हैं।
ईडी की यह कार्रवाई टोल प्लाजा पर कथित रूप से चल रहे उस नेटवर्क की जांच के तहत की गई है, जिसमें अनधिकृत सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जी टोल रसीदें बनाने और वसूली में गड़बड़ी का आरोप है। जांच एजेंसी अब बरामद डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
सात राज्यों में 14 ठिकानों पर छापेमारी
ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने इस मामले में उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों में कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने कुल 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
जिन स्थानों पर कार्रवाई की गई, उनमें उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्र शामिल हैं। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने संदिग्धों के ठिकानों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।
कैसे हुआ टोल फर्जीवाड़े का खुलासा?
इस पूरे मामले का खुलासा उत्तर प्रदेश एसटीएफ की जांच के बाद हुआ था। जांच में सामने आया कि कुछ टोल प्लाजा पर कथित तौर पर ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो NHAI के आधिकारिक सिस्टम से अलग तरीके से टोल वसूली करने में मदद करते थे।
आरोप है कि बिना फास्टैग वाले वाहनों या अन्य श्रेणी के वाहनों से टोल वसूली के लिए अनधिकृत ऐप और सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इससे टोल कलेक्शन का सही रिकॉर्ड सरकारी सिस्टम तक नहीं पहुंचने की आशंका जताई गई।
फर्जी रसीदों से करोड़ों की वसूली का आरोप
ईडी की जांच में दावा किया गया है कि अनधिकृत सॉफ्टवेयर के जरिए बड़ी संख्या में फर्जी टोल रसीदें तैयार की गईं। जांच एजेंसी को डिजिटल रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये की कथित अवैध टोल वसूली से जुड़े सबूत मिले हैं।
एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे खेल में कितने लोग शामिल थे और अवैध तरीके से जुटाई गई रकम कहां-कहां भेजी गई।
100 टोल प्लाजा तक फैला नेटवर्क?
जांच के दौरान ईडी को ऐसे संकेत मिले हैं कि यह गड़बड़ी सिर्फ एक टोल प्लाजा तक सीमित नहीं थी। डिजिटल डिवाइस और सॉफ्टवेयर रिकॉर्ड की जांच में करीब 100 टोल प्लाजा से जुड़े लिंक सामने आने की बात कही गई है।
एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन-किन टोल प्लाजा पर इस तरह की गतिविधियां चल रही थीं और इसमें कौन-कौन से ऑपरेटर या कर्मचारी शामिल थे।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
ईडी के अनुसार, तलाशी अभियान के दौरान:
* 1.03 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए
* 8 बैंक लॉकर फ्रीज किए गए
* बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड मिले
* डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक डेटा जब्त किए गए
* संदिग्ध दस्तावेज और अकाउंट बुक बरामद हुईं
इन सभी की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच
ईडी इस मामले की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि टोल वसूली से जुड़ी कथित अवैध कमाई का इस्तेमाल कहां किया गया और किन लोगों या संस्थाओं को इसका फायदा मिला।
जांच एजेंसी संदिग्ध बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।
NHAI और टोल कंपनियों की भूमिका की जांच
जांच का दायरा अब टोल प्लाजा संचालकों और संबंधित कंपनियों तक भी पहुंच गया है। ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस पूरे मामले में किसी अंदरूनी मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया गया।
टोल वसूली व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए NHAI की ओर से डिजिटल सिस्टम लागू किए गए हैं, लेकिन जांच में कथित तौर पर इन व्यवस्थाओं को दरकिनार करने की बात सामने आई है।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
ईडी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच करेगी। जांच के आधार पर आने वाले समय में और लोगों से पूछताछ या कार्रवाई की जा सकती है।
एजेंसी का फोकस इस बात पर है कि फर्जीवाड़े की पूरी रकम कितनी है, इसमें कौन-कौन शामिल हैं और सरकारी राजस्व को कितना नुकसान पहुंचा।