लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगने जा रहा है। पार्टी के तीन बागी विधायक आगामी 14 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इनमें अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या जिले की गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन जिले की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने के लिए अमेठी के गौरीगंज में बड़े कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। इस कार्यक्रम में भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। तीनों विधायक इससे पहले 2024 के राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से बगावत करके भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान कर चुके हैं।
14 अक्टूबर को गौरीगंज में होगा सदस्यता कार्यक्रम
सपा के बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह ने खुद भाजपा में शामिल होने की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे गौरीगंज स्थित उनके निजी आवास 'मंगलम' के प्रांगण में सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों, समर्थकों और कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के पहुंचने की तैयारी की जा रही है।
कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तीनों विधायकों को आधिकारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाएंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की मौजूदगी में होने वाला यह आयोजन अमेठी की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राकेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना
भाजपा में शामिल होने की घोषणा के साथ ही राकेश प्रताप सिंह ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है।उन्होंने सपा पर परिवारवाद और जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। साथ ही पार्टी के हिंदुत्व और सनातन धर्म के प्रति रवैये पर भी सवाल उठाए।राकेश प्रताप सिंह ने समाजवादी पार्टी के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के राजनीतिक फार्मूले को लेकर भी निशाना साधा।
उनका आरोप है कि समाजवादी पार्टी जिन वर्गों के हितों की बात करती है, उनके लिए वास्तविक स्तर पर काम नहीं कर रही है। उन्होंने भाजपा की नीतियों और नेतृत्व की सराहना करते हुए पार्टी में शामिल होने का फैसला सार्वजनिक किया।
2024 के राज्यसभा चुनाव में हुई थी बगावत
इन तीनों विधायकों की समाजवादी पार्टी से दूरी वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान सामने आई थी।उस चुनाव में समाजवादी पार्टी के कुछ विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के बजाय भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी।राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भी उन विधायकों में शामिल थे, जिनकी मतदान प्रक्रिया को लेकर समाजवादी पार्टी में विवाद पैदा हुआ था।
इस घटनाक्रम के बाद संबंधित विधायकों और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व के बीच राजनीतिक दूरियां बढ़ती गईं।अब लगभग ढाई साल बाद तीनों विधायक औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं।
जून 2025 में सपा ने की थी निष्कासन की कार्रवाई
राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग के बाद समाजवादी पार्टी ने बागी विधायकों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की थी।जून 2025 में सपा ने राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह सहित कुछ विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
इसके बाद विधानसभा में संबंधित विधायकों को असंबद्ध सदस्य के रूप में मान्यता दी गई।विनोद चतुर्वेदी भी 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में मतदान करने वाले विधायकों में शामिल रहे थे। हालांकि उन्हें उस समय पार्टी से निष्कासित नहीं किया गया था।
अमेठी की राजनीति में स्मृति ईरानी की सक्रियता
तीनों विधायकों के भाजपा में शामिल होने के कार्यक्रम में स्मृति ईरानी की प्रस्तावित मौजूदगी ने अमेठी की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।स्मृति ईरानी इससे पहले अमेठी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अब गौरीगंज में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राकेश प्रताप सिंह गौरीगंज विधानसभा सीट से विधायक हैं। ऐसे में उनके भाजपा में शामिल होने का आयोजन उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में ही रखा गया है।कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और प्रदेश सरकार के मंत्रियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।
अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भी बदलेंगे दल
गोसाईगंज विधायक अभय सिंह भी समाजवादी पार्टी से बगावत के बाद चर्चा में रहे हैं। वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव में उनके मतदान को लेकर पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद सामने आए थे।वहीं, विनोद चतुर्वेदी जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था।
राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में मतदान करने के बाद उनका नाम भी सपा के बागी विधायकों में शामिल हो गया था।अब दोनों नेता राकेश प्रताप सिंह के साथ 14 अक्टूबर को भाजपा की सदस्यता लेने वाले हैं।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों ही संगठन को मजबूत करने तथा चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटी हैं।ऐसे समय में समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायकों का भाजपा में शामिल होना महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है।
हालांकि ये तीनों नेता पहले ही समाजवादी पार्टी के नेतृत्व से दूरी बना चुके थे। इसलिए उनके भाजपा में औपचारिक प्रवेश को पहले से बने राजनीतिक संबंधों की सार्वजनिक पुष्टि के रूप में भी देखा जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव के बीच भी बढ़ी सियासी सरगर्मी
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं।राज्य की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, जबकि समाजवादी पार्टी ने दो उम्मीदवार उतारे हैं।
इस चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों का संख्या बल और विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण है।इसी बीच तीन बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने की घोषणा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक और नया घटनाक्रम जोड़ दिया है।
तीनों विधायकों के अगले कदम पर नजर
फिलहाल 14 अक्टूबर को आयोजित होने वाले सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम की तैयारियां चल रही हैं। राकेश प्रताप सिंह ने अपने स्तर पर कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी है।वहीं, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी के भी इसी कार्यक्रम में भाजपा में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
अब सभी की नजर गौरीगंज में होने वाले आयोजन पर रहेगी, जहां स्मृति ईरानी और पंकज चौधरी की मौजूदगी में तीनों बागी विधायकों का भाजपा में औपचारिक प्रवेश प्रस्तावित है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच जारी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में सामने आया है।