सहारनपुर : एक महिला जूनियर इंजीनियर (JE) ने अपने ही विभाग के एक अन्य जूनियर इंजीनियर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला जेई का आरोप है कि आरोपी ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और जबरन शराब पिलाने की कोशिश की। शिकायत के बाद पुलिस और विभागीय स्तर पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।जानकारी के अनुसार, महिला जेई ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी जेई ने उसके साथ गलत व्यवहार किया। पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने कथित तौर पर उसकी गर्दन पकड़कर शराब पिलाने की कोशिश की। घटना के बाद महिला जेई ने मामले की जानकारी अधिकारियों को दी और कानूनी कार्रवाई की मांग की।
शिकायत के बाद हरकत में आया विभाग
महिला जेई की शिकायत सामने आने के बाद संबंधित विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों ने घटना की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए जरूरी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकते हैं।
पुलिस ने शुरू की जांच
मामले की सूचना पुलिस को भी दी गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान पीड़िता के बयान, घटनास्थल से जुड़ी जानकारी और अन्य साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों और जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा का मुद्दा
इस घटना ने एक बार फिर कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी और निजी संस्थानों में कर्मचारियों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी माना जाता है।विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार, उत्पीड़न या जबरदस्ती जैसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सहकर्मी पर लगे गंभीर आरोप
महिला जेई और आरोपी जेई दोनों एक ही विभाग से जुड़े बताए जा रहे हैं। ऐसे में मामले को लेकर विभाग में भी चर्चा शुरू हो गई है।पीड़िता के आरोपों के अनुसार, घटना के दौरान आरोपी ने उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। हालांकि, आरोपी पक्ष की प्रतिक्रिया या उसका बयान अभी सामने नहीं आया है।
जांच में सामने आएगी सच्चाई
किसी भी मामले में शिकायत और आरोप शुरुआती जानकारी होती है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घटना की वास्तविक स्थिति क्या थी और आरोपों में कितनी सच्चाई है।जांच एजेंसियां आमतौर पर शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों पक्षों के बयान दर्ज करती हैं तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करती हैं।
अधिकारियों ने दिए निष्पक्ष जांच के संकेत
विभागीय अधिकारियों ने कहा है कि मामले में निष्पक्ष जांच की जाएगी। किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं होगा और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।वहीं, महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान बनाए रखने के लिए संस्थानों में निर्धारित नियमों का पालन करने पर भी जोर दिया जा रहा है।