अमरमणि त्रिपाठी की वापसी की चर्चाओं से पीड़ित परिवार सहमा
योगी सरकार से सुरक्षा की मांग
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की कथित राजनीतिक सक्रियता को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड और अमनमणि त्रिपाठी की दिवंगत पत्नी सारा सिंह की मौत से जुड़े पीड़ित परिवारों ने शुक्रवार को लखनऊ में संयुक्त प्रेसवार्ता कर अपनी सुरक्षा और न्याय को लेकर गंभीर चिंता जताई। मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला और सारा सिंह की मां सीमा सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि राज्य में अपराध और माफिया के खिलाफ सरकार की सख्त नीति जारी रहनी चाहिए तथा किसी भी दोषी या अपराधी को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
प्रेसवार्ता के दौरान दोनों परिवारों ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में अमरमणि त्रिपाठी और उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी की राजनीतिक सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। उनका कहना था कि नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान दोनों के समर्थन में नारे लगाए गए, जिससे पीड़ित परिवारों में असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई है। परिवारों का कहना है कि ऐसे घटनाक्रम उन लोगों के लिए चिंता का विषय हैं, जिन्होंने वर्षों तक न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है।
मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने कहा कि उनका परिवार वर्ष 2003 से लगातार न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि अमरमणि त्रिपाठी दोबारा राजनीतिक रूप से प्रभावशाली होते हैं तो इससे पीड़ित परिवारों की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि सरकार अपने माफिया विरोधी अभियान को पूरी सख्ती के साथ जारी रखे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी अपराधी को किसी भी स्तर पर संरक्षण न मिले। उन्होंने कहा कि कानून का राज कायम रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और पीड़ित परिवारों को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए।
निधि शुक्ला ने इस अवसर पर यह भी घोषणा की कि मधुमिता शुक्ला हत्याकांड पर आधारित उनकी पुस्तक **'मेरी बहन का कत्ल'** अगले महीने प्रकाशित होने जा रही है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में मामले से जुड़े कई ऐसे तथ्य शामिल किए गए हैं, जो अब तक सार्वजनिक नहीं हो पाए थे। उनके अनुसार पुस्तक में ऑन रिकॉर्ड और ऑफ रिकॉर्ड दोनों तरह की जानकारियों को दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि न्याय की लंबी लड़ाई का दस्तावेज भी होगी।
उन्होंने मीडिया की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में मीडिया ने इस मामले को लगातार जनचर्चा में बनाए रखा। यदि यह मामला समय-समय पर लोगों के सामने नहीं आता, तो संभव है कि न्याय की प्रक्रिया भी इतनी मजबूती से आगे नहीं बढ़ पाती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पीड़ितों की आवाज को समाज और सरकार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण होती है।
प्रेसवार्ता के दौरान सारा सिंह की मां सीमा सिंह भी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की मौत के मामले में न्याय की लड़ाई आज भी उनके जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष है। उन्होंने कहा कि एक मां के लिए अपनी बेटी को खोने का दर्द कभी खत्म नहीं होता और जब ऐसे लोगों की राजनीतिक सक्रियता की खबरें सामने आती हैं तो पुराने घाव फिर से ताजा हो जाते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि पीड़ित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और अपराध के मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों को किसी भी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण न मिले।
गौरतलब है कि 9 मई 2003 को लखनऊ में राष्ट्रीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामले की जांच पहले सीबी-सीआईडी और बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी। निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मुकदमे का स्थानांतरण उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड कर दिया गया था। बाद में देहरादून की अदालत ने अमरमणि त्रिपाठी सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को नैनीताल हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
प्रेसवार्ता में पीड़ित परिवारों ने कहा कि न्याय केवल अदालत के फैसलों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज और व्यवस्था में भी पीड़ितों को सुरक्षा और सम्मान का भरोसा मिलना चाहिए। उनका कहना था कि यदि अपराध में दोषी ठहराए गए लोग फिर से सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय होते हैं तो इससे न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है। परिवारों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस पूरे मामले का संज्ञान लें और पीड़ित परिवारों की सुरक्षा के साथ-साथ कानून के शासन को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।