शाहजहांपुर : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में सोलर पैनल चोरी के आरोपी युवक की संदिग्ध मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और कई घंटों तक तिलहर-निगोही मार्ग जाम रखा। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक, धक्का-मुक्की और पथराव की घटना भी सामने आई। हालात इतने बिगड़ गए कि अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। करीब तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस अधिकारियों के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त हुआ और यातायात बहाल कराया गया।
जानकारी के अनुसार, तिलहर क्षेत्र के नबियापुर गांव निवासी 25 वर्षीय उमेश पर कुछ दिन पहले सोलर पैनल चोरी का आरोप लगा था। बुधवार को उसका शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला। घटना के बाद मृतक के परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए गांव के कुछ लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। परिजनों का आरोप है कि उमेश की हत्या कर शव को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगना बताया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
मृतक के भाई ने पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों ने चोरी के मामले को लेकर उमेश के साथ दुर्व्यवहार किया था। वहीं परिवार का यह भी दावा है कि स्थानीय पुलिस चौकी के प्रभारी और एक सिपाही ने पूछताछ के दौरान उमेश के साथ मारपीट की थी। इसी आरोप को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी फैल गई और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे। परिजनों ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद जब उमेश का शव गांव पहुंचा तो परिजन और ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली में शव रखकर तिलहर-निगोही मार्ग पर पहुंच गए। उन्होंने सड़क पर वाहन खड़े कर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मामले के मुख्य आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, मृतक के साथ कथित मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो तथा परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। मौके पर मौजूद महिलाओं ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और पुलिस के खिलाफ आक्रोश जताया। आरोप है कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने पुलिस पर पत्थर भी फेंके, जिससे एक अधिकारी को चोट लगी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहन पर चप्पल फेंके जाने और पुलिसकर्मियों को चप्पल दिखाकर विरोध जताने की घटनाएं भी सामने आईं।
स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने आसपास के कई थानों से अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर बुलाया। क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से लगातार बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन शुरुआती दौर में कोई सहमति नहीं बन सकी।
इस बीच क्षेत्र की विधायक भी मौके पर पहुंचीं और परिजनों से बातचीत कर प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की। हालांकि ग्रामीण तब तक नहीं माने, जब तक उन्हें प्रशासन की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिला। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि मामले में फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी और पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया और शव का अंतिम संस्कार किया गया।
एसपी ग्रामीण दीक्षा भंवरे ने बताया कि मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों द्वारा पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की भी गंभीरता से जांच कराई जा रही है। यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात है और पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मौत के कारणों और लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं इस घटना ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई, हिरासत में पूछताछ की प्रक्रिया और ग्रामीण क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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