उत्तरप्रदेश: एसएनएमसी में कुत्ते और बंदरों का उत्पात अब नासूर बन चुका है. इधर, सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल शुरू होने के बाद महंगे उपकरण, गाड़ियां भी परिसर में आ गई हैं. कालेज प्रशासन ने नगर निगम और वन विभाग को इन्हें पकड़ने और बंध्याकरण के लिए लिखा है.
अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की संख्या अचानक बढ़ी है. अब यह मरीज और तीमारदारों पर हमला भी करने लगे हैं. बंदरों का आतंक पहले से है. मरीजों की दवाइयां, खाना छीन ले जाना रोज की बात है. गाड़ियों की सीटें फाड़ डालते हैं. अभी तक यह आतंक इमारतों के बाहर था, लेकिन अब अंदर आ गया है. लगभग हर विभाग में कुत्ते और बंदर दिख ही जाएंगे.
बंदरों की तोड़फोड़ से विभागों में भी नुकसान हुआ है. इन्होंने बेड, चेयर, खिड़कियां, दरवाजों को क्षति पहुंचाई है. इसलिए, अब कालेज प्रशासन इनका पक्का इंतजाम करने की तैयारी में है. कालेज ने नगर निगम और वन विभाग से बात की है. पत्र भी लिखा है. नगर निगम को अलग से पत्र लिखा जा रहा है कि कुत्ते और बंदरों को पकड़ा जाए. इन्हें बंध्याकरण के बाद ही कहीं दूर छोड़ा जाए. वन विभाग और नगर निगम इनके लिए स्थान तय कर चुके हैं.
सुपर विंग के महंगे उपकरणों को खतरा सुपर विंग की आठों मंजिलों पर मशीन और उपकरण स्थापित हो चुके हैं. इनकी कीमत लाखों रुपयों में है. यदि बंदर और कुत्ते इस भवन में पहुंच गए तो भारी नुकसान हो सकता है. साथ ही गंभीर और दुर्लभ मरीजों का इलाज मुश्किल में पड़ जाएगा. कालेज की सबसे बड़ी चिंता सुपर विंग को लेकर है. बंदरों ने पुरानी इमारतों में भी बड़ा नुकसान किया है.
बंदर बहुत नुकसान कर चुके हैं. अब सुपर स्पेशियालिटी भवन को लेकर चिंता है. वहां महंगे उपकरण और मशीनें हैं, इसलिए वन विभाग और नगर निगम को अनुरोध किया है. वे जल्द ही अभियान शुरू कर सकते हैं.
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