जेवर। उत्तर प्रदेश में बंद अथवा मर्ज किए गए प्राथमिक विद्यालयों को लेकर समाजवादी पार्टी और प्रदेश सरकार के बीच सियासी टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आह्वान पर बंद या मर्ज किए गए प्राथमिक स्कूलों के समीप शिक्षक दिवस मनाने जा रहे सपा नेताओं को जेवर क्षेत्र में पुलिस ने समर्थकों सहित गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान पुलिस और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी के नेता विकास जतन भाटी और लोकेश भाटी अपने समर्थकों के साथ शिक्षक दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए जा रहे थे। सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी नेतृत्व की ओर से बंद अथवा मर्ज किए गए प्राथमिक विद्यालयों के पास शिक्षक दिवस मनाने का आह्वान किया गया था। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नेता और कार्यकर्ता निकले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया।

पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद सपा नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच बहस शुरू हो गई। कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में जाने देने की मांग की, जबकि पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बाद में पुलिस ने विकास जतन भाटी और लोकेश भाटी समेत उनके साथ मौजूद समर्थकों को हिरासत में ले लिया।

गिरफ्तारी को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। सपा नेता विकास जतन भाटी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में सत्ता हाथ से निकलती देख भाजपा घबराई हुई है और इसी बौखलाहट में विपक्ष के लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

विकास जतन भाटी ने कहा कि शिक्षक दिवस शिक्षकों के सम्मान का अवसर है और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे थे। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंचने दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई राजनीतिक दल या उसके कार्यकर्ता शिक्षकों का सम्मान करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं तो उसे कानून-व्यवस्था के लिए खतरे के तौर पर क्यों देखा जा रहा है।

सपा नेता ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में विरोध और असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, “भाजपा की नजर में शिक्षकों का सम्मान करना और शिक्षक दिवस मनाना भी अपराध की श्रेणी में आता है।” उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी स्कूलों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लगातार जनता के बीच उठाती रहेगी।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के मर्जर और बंद किए जाने का मुद्दा पिछले कुछ समय से राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। विपक्ष इस मुद्दे को सरकारी शिक्षा व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा से जोड़कर सरकार को घेर रहा है। समाजवादी पार्टी भी इसे प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठा रही है।

इसी क्रम में शिक्षक दिवस को समाजवादी पार्टी ने बंद अथवा मर्ज किए गए स्कूलों के मुद्दे को सामने लाने के अवसर के रूप में चुना। पार्टी नेतृत्व के आह्वान के बाद विभिन्न क्षेत्रों में सपा कार्यकर्ताओं की ओर से कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की गई। जेवर में भी इसी तरह के आयोजन की तैयारी थी, लेकिन पुलिस कार्रवाई के कारण कार्यक्रम से पहले ही सपा नेताओं को हिरासत में ले लिया गया।

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल गरमा गया। सपा समर्थकों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताया। उनका कहना था कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना था और इसमें किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की मंशा नहीं थी।

वहीं, इस घटनाक्रम को लेकर समाजवादी पार्टी ने भाजपा सरकार को शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों के मर्जर से प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को जनता के सामने लाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और पुलिस कार्रवाई के बावजूद वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।

जेवर में शिक्षक दिवस के कार्यक्रम को लेकर हुई गिरफ्तारी अब स्थानीय राजनीति से आगे प्रदेश की शिक्षा नीति से जुड़ी सियासी लड़ाई का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी बंद और मर्ज किए गए विद्यालयों के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ अपना अभियान और तेज कर सकती है।

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