नई दिल्ली: मां के प्रति बेटे के प्रेम और समर्पण की एक भावुक तस्वीर सामने आई है। एक बेटे ने अपनी 62 वर्षीय मां की इच्छा और सुख-स्वास्थ्य के लिए ऐसा कदम उठाया, जिसने लोगों का दिल जीत लिया। बेटे ने अपनी बुजुर्ग मां को पालकी में बैठाकर करीब 120 किलोमीटर की पैदल धार्मिक यात्रा शुरू की है।

बताया जा रहा है कि बेटे का उद्देश्य अपनी मां को यात्रा कराना और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करना है। उम्र बढ़ने के कारण मां के लिए इतनी लंबी दूरी पैदल तय करना संभव नहीं था, इसलिए बेटे ने उन्हें पालकी में बैठाकर यह जिम्मेदारी खुद उठाई।
बेटे ने कहा कि उसके लिए मां की खुशी और स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ नहीं है। जीवन में माता-पिता ने बच्चों के लिए बहुत कुछ त्याग किया है, इसलिए अब उनका ख्याल रखना और उनकी इच्छाओं को पूरा करना बेटे का कर्तव्य है।
120 किलोमीटर की इस कठिन यात्रा में बेटा लगातार अपनी मां को पालकी में लेकर आगे बढ़ रहा है। रास्ते में जब लोग मां-बेटे के इस अनोखे रिश्ते को देखते हैं तो भावुक हो जाते हैं और उनकी सराहना करते हैं। कई लोग इस यात्रा को माता-पिता के प्रति सम्मान और सेवा की मिसाल बता रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के समय में जब कई लोग बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में यह बेटा समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। उसकी मेहनत और भावनाओं ने लोगों को माता-पिता के महत्व का संदेश दिया है।
धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। भारतीय संस्कृति में मां को भगवान के समान स्थान दिया गया है। ऐसे में बेटे का यह प्रयास लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
यात्रा के दौरान मां भी बेटे के इस समर्पण से भावुक नजर आईं। उन्होंने बेटे के लिए आशीर्वाद देते हुए कहा कि हर माता-पिता को ऐसा संतान मिले, जो उनके सुख-दुख में साथ खड़ा रहे।
यह घटना सिर्फ एक यात्रा नहीं बल्कि मां-बेटे के उस रिश्ते की कहानी है, जिसमें प्यार, जिम्मेदारी और सम्मान शामिल है। बेटे ने साबित कर दिया कि माता-पिता के लिए किया गया छोटा सा प्रयास भी जीवन की सबसे बड़ी सेवा बन सकता है।
Tags: